Sahibganj: राष्ट्रीय लोक अदालत बिना किसी विलम्ब से अपने विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए एक मंच है जिसमें निर्णय पक्षकार आपसी सहमति से करते हैं। इससे आपस की लड़ाई वहीं खत्म हो जाती है । इसमें पक्षकार आपस में समझौता स्वयं करते हैं, न कि न्यायालय फैसला करती है । उपर्युक्त बातें शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित लोक अदालत कक्ष में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश -सह- जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष अखिल कुमार ने कहीं।
उन्होंने आगे कहा कि जब पक्ष और विपक्ष आपस में केस लड़ते है, तो एक पक्ष जीतता है तो दूसरा पक्ष हारता है, लेकिन राष्ट्रीय लोक अदालत का निर्णय, अन्तिम निर्णय होता है, जिसकी अपील नहीं होती है और आपसी सुलह समझौते के आधार पर निर्णय होने पर दोनों पक्ष जीतते है। प्रभावित पक्षकारों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करने की दिशा में राष्ट्रीय लोक अदालत एक प्रभावशाली कदम है। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में साहेबगंज अनुमंडल में कुल 5145 वादों का निस्तारण किया गया जिसकी समझौता राशि 10076781 रूपया है।
राष्ट्रीय लोक अदालत का विधिवत् उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार अखिल कुमार, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायलय संजय कुमार उपाध्याय, आरक्षी अधीक्षक अमित कुमार सिंह, डीएफओ प्रबल गर्ग, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रेमनाथ तिवारी सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
प्राधिकार के सचिव विश्वनाथ भगत ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सात बेंचों के माध्यम से कोर्ट में लंबित, प्री-लिटिगेशन के मामले एवं अन्य सुल्हनीय मामलों का निस्तारण किया गया।
लोक अदालत में जिला न्यायाधीश सह अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम धीरज कुमार, सीजेएम धर्मेन्द्र कुमार, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी तुषार आनंद, रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी राहुल कुमार, न्यायिक दंडाधिकारी, प्रथम श्रेणी सुमित कुमार वर्मा, स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष राकेश कुमार मिश्रा, जिला लोक अभियोजक आनंद कुमार चौबे, मुख्य लीगल एड डिफेंस काउंसिल अरविन्द गोयल व उनकी टीम, अग्रणी बैंक प्रबंधक सुधीर कुमार, अधिवक्ता रेणुका कुमारी आदि मौजूद थे।
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