Chaiti Chhath Puja 2025: तीनपहाड़ एवं आसपास के गांवों में चैती छठ पूजा बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। छठ पूजा का अर्घ्य की तैयारी कोई गंगा घाट पर तो कोई नदी में,पोखरा में, कोई कुआं पर, तो कोई अपने छत पर अस्ताचलगामी सूर्यदेव को पहला अर्घ्य देकर माता छठी को प्रणाम किया। लोक आस्था का महापर्व छठ साल में दो बार मनाया जाता है, पहला चैत्र के महीने में और दूसरा कार्तिक मास में, चार दिन तक चलने वाले इस महापर्व की शुरूआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है और सप्तमी तिथि को समापन। 1 अप्रैल से शुरू हुए चैती छठ के पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना व्रती द्वारा किया गया, और गुरुवार को सायंकालीन अर्घ्य सूर्य देव को दिया गया।
आज सुबह 6 बजकर 8 मिनट पर सूर्योदय हुआ, शुक्रवार को चैत्र शुक्ल सप्तमी में उदीयमान सूर्य को मृगशिरा नक्षत्र, शोभन योग व रवि योग के सुयोग में अर्घ्य देकर व्रतियों ने व्रत का समापन किया।

- छठ का महत्व:
आस्था का महापर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए होता है। यह पर्व सूर्य देव की बहन छठी की आराधना के लिए समर्पित है। कहते है छठ पर्व का व्रत रखने से नि:संतानों को संतान की प्राप्ति होती है। साथ ही घर परिवार में सुख-शांति आती है। इसके अलावा घर से नकारात्मकता दूर होती है। वहीं यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, यूपी, झारखंड, बंगाल, में मनाया जाता है। लेकिन विगत कई सालों से यह अब पूरे देश में धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। यहां तक कि विदेश में रह रहे भारतीय भी आस्था के इस महापर्व को विदेशों में बड़े धूम-धाम के साथ मनाने लगे हैं।
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