Sahibganj: साहिबगंज में होटल व्यवसाय पर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। JSPCB से मिली जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय सहित आसपास के इलाकों में संचालित लगभग सभी होटलों के पास न तो झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) की मंजूरी है और न ही पर्यावरण विभाग (EC) की कोई स्वीकृति। जिले में कलिंगा व आशीर्वाद होटल ऐसा प्रतिष्ठान है जिसने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए प्रदूषण व पर्यावरण विभाग से आवश्यक अनुमति प्राप्त की है। बाकी होटल बगैर मंजूरी के धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। साहिबगंज नगर प्रशासन इन मामलों में पूरी तरह से सख्त है, कई बार नोटिस भी दे चूका है। लेकिन इसके बावजूद अबतक अहर्ता पूरी नहीं की गई है। जल्द ही विभाग ऐसे होटलों पर सील बंदी की कार्रवाई करेगा।
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पर्यावरण नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियाँ
पर्यटन स्थलों से लेकर शहर के व्यावसायिक क्षेत्रों में बने कई होटल न तो कचरा प्रबंधन नियमों का पालन कर रहे हैं और न ही सीवेज डिस्पोजल के उचित उपाय किए गए हैं। कई होटलों में जनरेटर, चिमनी और एयर कंडीशनर सिस्टम से होने वाला उत्सर्जन सीधे वातावरण में छोड़ा जा रहा है, जो हवा की गुणवत्ता को नुकसान पहुँचा रहा है।
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क्या कहता है नियम?
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 तथा जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत होटल, लॉज, रेस्टोरेंट या ऐसे किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान को संचालन से पूर्व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से Consent to Establish (CTE) और Consent to Operate (CTO) लेना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त होटल यदि बायोडीजल जनरेटर, रसोई गैस प्रणाली, वेस्ट वॉटर या कचरा उत्पन्न कर रहा है, तो उसके लिए पर्यावरण विभाग से अनुमति लेना भी आवश्यक है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सीलबंदी, जुर्माना और एफआईआर जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
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जवाबदेही किसकी?
स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त जिम्मेदारी है कि वे ऐसे गैर-कानूनी होटलों के विरुद्ध कार्रवाई करें। लेकिन अब तक किसी भी होटल पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है, जिससे यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि अधिकारियों की मिलीभगत के कारण मामला नजरअंदाज किया जा रहा है।
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कलिंगा और आशीर्वाद होटल अपवाद
JSPCB से मिली जानकारी के अनुसार केवल कलिंगा और आशीर्वाद होटल ही ऐसा प्रतिष्ठान है जिसने सभी जरूरी पर्यावरणीय अनुमतियाँ प्राप्त की हैं। होटल प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने सभी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन किया है।
पर्यावरण के मामले में साहिबगंज जैसे संवेदनशील जिले में गंगा नदी और पहाड़ी क्षेत्रों की निकटता के कारण होटल व्यवसाय से जुड़ी प्रदूषणकारी गतिविधियाँ न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रही हैं, बल्कि आम जनजीवन पर भी प्रतिकूल असर डाल रही हैं। इससे जल स्रोतों का दूषित होना, वायु प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ सामने आ सकती हैं।
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क्या कहते हैं नगर प्रशासक?
साहिबगंज नगर परिषद के नगर प्रशासक अभिषेक कुमार सिंह ने कहा कि,
“पर्यावरण नियमों के पालन के लिए यहां दो बार नोटिस व एक बार अपील की जा चुकी है। लेकिन अब तक होटल मालिकों ने नियमों का आहर्ता पूरा नहीं किया है। ऐसे में इन होटलों को जल्द सील किया जाएगा।”
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या नहीं। पर्यावरणीय नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वालों पर क्या कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में ही दब कर जाएगा?
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