Sahibganj, 18 जून 2025 (बुधवार): बरहरवा रेलवे स्टेशन पर समय रहते की गई आरपीएफ की सतर्क कार्रवाई से चार नाबालिग लड़कियां संभावित मानव तस्करी का शिकार होने से बच गईं। आरपीएफ इंस्पेक्टर संजीव कुमार के नेतृत्व में चलाए गए तलाशी अभियान में प्लेटफॉर्म संख्या-1 के मुख्य द्वार के पास चार नाबालिग लड़कियां संदिग्ध हालात में घूमती पाई गईं। टीम में शामिल कांस्टेबल जितेंद्र प्रसाद यादव, कुमार प्रलयंकर और शहजाद अंसारी, के साथ बाल संरक्षण संस्था ‘मंथन’ की प्रतिनिधि आराधना मंडल भी मौजूद थीं।
गुप्त सूचना के आधार पर शुरू की गई इस जांच में खुलासा हुआ कि सभी लड़कियां साहिबगंज जिले की निवासी हैं और पारिवारिक कलह से तंग आकर मुंबई जाकर घरेलू काम करने की योजना बना चुकी थीं। हालांकि उन्होंने किसी दलाल या एजेंट के संपर्क में होने की बात से इनकार किया है, लेकिन पुलिस मानव तस्करी के एंगल से भी जांच कर रही है, ताकि किसी संभावित गिरोह का भंडाफोड़ किया जा सके।
प्रारंभिक कागजी प्रक्रिया के बाद चारों लड़कियों को विधिक संरक्षण हेतु बाल कल्याण समिति के निर्देशानुसार ‘मंथन’ संस्था की प्रतिनिधि आराधना मंडल को सौंप दिया गया है। आरपीएफ बरहरवा ने इस पूरे मामले की सूचना स्थानीय थाने और जिला बाल संरक्षण इकाई को भी दे दी है।
स्थानीय प्रशासन और बाल कल्याण समिति ने आरपीएफ की इस तत्परता और मानवीय सजगता की सराहना की है। अधिकारियों का कहना है कि अगर समय पर यह कार्रवाई न होती, तो ये नाबालिग लड़कियां असुरक्षित हालात में फंस सकती थीं। इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि रेलवे स्टेशन मानव तस्करी के ट्रांजिट प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं, और वहां तैनात बल की सजगता कितनी महत्वपूर्ण होती है।
हालांकि लड़कियों ने खुद जाने की बात कबूल की है, लेकिन यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि क्या कोई बाहरी तत्व इसमें शामिल था या नहीं। पुलिस इस दिशा में और गहराई से जांच कर रही है।
मानव तस्करी, विशेषकर नाबालिग लड़कियों की, देशभर में एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। झारखंड जैसे राज्य, जहां सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां कई बार बच्चों को मजबूरी में घर छोड़ने पर विवश करती हैं, वहां स्थानीय पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल और बाल संरक्षण इकाइयों की सजगता ही सबसे बड़ी ढाल बन सकती है।
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