Sahibganj: साहिबगंज जिले के भोगनाडीह में हूल दिवस के अवसर पर हुई हिंसा अब सिर्फ एक स्थानीय विरोध की घटना नहीं रह गई है। लगातार हो रहे खुलासों ने इस पूरे प्रकरण को एक गंभीर राजनीतिक षड्यंत्र का रूप दे दिया है। गोड्डा पुलिस द्वारा दो संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, उनसे यह संकेत मिल रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम पूर्व-नियोजित, राजनीतिक रूप से प्रेरित और सरकार को अस्थिर करने के उद्देश्य से रचा गया था।
गोड्डा एसपी मुकेश कुमार ने मंगलवार को प्रेस वार्ता में बताया कि हिंसा की तैयारी 10 दिन पहले से चल रही थी। पुलिस को इनपुट मिले थे कि बरहेट और बोरियो क्षेत्र में कुछ संदिग्ध लोग हथियार और पारंपरिक कपड़े (धोती-साड़ी) आदिवासियों के बीच बांट रहे हैं। इस प्रयास का उद्देश्य हूल दिवस के दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यक्रम को बाधित करना और सांप्रदायिक उकसावे के जरिए माहौल को अस्थिर करना था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गोड्डा नगर क्षेत्र से दो लोगों सुधीर कुमार (जमशेदपुर निवासी) और गणेश मंडल (ओडिशा निवासी) को गिरफ्तार किया। इनके पास से तीन हथियार, जिंदा कारतूस और बड़ी संख्या में धोती-साड़ी बरामद हुई है। जांच में सामने आया है कि ये दोनों राजनीतिक दल से जुड़े हैं और एक पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के सोशल मीडिया अकाउंट का संचालन भी करते रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि ये आरोपी पिछले कुछ दिनों से साहिबगंज और आस-पास के क्षेत्रों में घूम-घूम कर भीड़ तैयार कर रहे थे और आदिवासियों को कार्यक्रम के दिन भड़काने की रणनीति पर काम कर रहे थे। गोड्डा एसपी ने यह भी बताया कि अब इन आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी, ताकि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। कुछ संदिग्ध मौके से फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
इस पुरे मामले में जिस तरह से सिदो-कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू, जो हाल ही में भाजपा में शामिल हुए थे, सामने आए और उन्होंने विरोध का नेतृत्व किया, उससे यह संदेह और भी गहराता है कि यह आंदोलन सिर्फ सांस्कृतिक असंतोष नहीं, बल्कि एक राजनीतिक स्क्रिप्ट का हिस्सा था। गौरतलब है कि मंडल मुर्मू ने उपद्रव से एक दिन पहले कुछ लोगों ने स्मृति स्थल पर ताला जड़कर वहां होने वाले सरकारी कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की थी। प्रशासन की ओर से दिए गए विकल्पों को सिरे से खारिज कर दिया गया और भीड़ द्वारा पारंपरिक हथियारों के साथ विरोध दर्ज कराया गया। जिसको लेकर बरहेट थाना में कांड संख्या 102/25 दर्ज़ किया गया था।
विशेष बात यह है कि इस घटना से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और अन्य वरिष्ठ भाजपा नेता संथाल परगना का दौरा कर चुके थे। उसी समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि भाजपा की नजर संथाल परगना की राजनीतिक ज़मीन मजबूत करने पर है। इन नेताओं की क्षेत्र में सक्रियता और बाद में भोगनाडीह में हुई घटना ने राजनीतिक इरादों को संदेह के घेरे में ला दिया है। भोगनाडीह में शहीद के वंशज मंडल मुर्मू के नेतृत्व में विरोध शुरू हो गया, जो सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को प्रभावित करता नजर आया।
हूल दिवस, जो आदिवासी चेतना और बलिदान की प्रतीकात्मकता का सबसे बड़ा पर्व है, उसके दिन ही राज्य में अस्थिरता पैदा करना सिर्फ संयोग नहीं हो सकता। यह एक ऐसी कोशिश प्रतीत होती है जिसमें सरकार को असंवेदनशील और दमनकारी दिखाकर आदिवासी समाज को भड़काने का प्रयास किया गया है।
झामुमो के प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने इसे राज्य की शांति भंग करने का सुनियोजित षड्यंत्र बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं करेगी और जो भी इसमें शामिल होगा, चाहे वह किसी भी दल या पद पर हो, कानूनी कार्रवाई से नहीं बचेगा।
हालांकि भाजपा इस मामले में राज्य सरकार को दमनकारी बता रही है। मामले में भाजपा प्रवक्ता प्रतुल नाथ सहदेव से संपर्क किया गया, लेकिन खबर प्रसारित किये जाने तक उनकी कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई।
फिलहाल, पुलिस की जांच तेजी से चल रही है। पूछताछ और गिरफ्तारियों के बाद आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि क्या यह केवल क्षेत्रीय असंतोष था या इसके पीछे झारखंड की सत्ता को अस्थिर करने की एक बड़ी राजनीतिक साजिश काम कर रही थी।









