Sahibganj: गंगा का चढ़ता जलस्तर और पुल निर्माण की रफ्तार, क्या दिसंबर तक संभव है उद्घाटन?

Sahibganj: Rising water level of Ganga and speed of bridge construction, is inauguration possible by December?

Sahibganj, 21 जुलाई:  इस साल जून-सितंबर के दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सामान्य से अधिक वर्षा (106% एलपीए) का अनुमान जताया है। खासकर मध्य भारत एवं दक्षिणी प्रायद्वीपीय इलाकों में सामान्य से अधिक, जबकि उत्तर-पश्चिम व पूर्वोत्तर में सामान्य या कम बारिश की संभावना है। भारी मॉनसून के मद्देनजर जल संसाधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग का ध्यान भी गंगा नदी पर है। लगातार बारिश के बाद जुलाई 2025 में साहिबगंज में गंगा के जलस्तर में तेजी आई; CWC की रिपोर्ट के अनुसार जलस्तर रविवार को 26.89 मीटर पहुँच गया (खतरे के निशान 26.25 मी.) और सोमवार तक 27.25 मीटर तक पहुँचने का अनुमान है। इससे जाहिर है कि गंगा में बाढ़ की स्थिति बन सकती है।

मानसून में पुल निर्माण पर प्रभाव

मूसलाधार वर्षा से निर्माण कार्य में बाधाएँ आती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भारी पानी तेज बहाव उत्पन्न करता है जो निर्माण सामग्री बहा सकता है और कामगारों के लिए ख़तरा बन सकता है। खासकर नींव खोदने और पिलर की खुदाई के समय यह जोखिम बढ़ जाता है। भारी बारिश के दौरान नींव की खुदाई और ताज़ा कंक्रीट का काम रुक जाता है, क्योंकि गीली मिट्टी स्थिर नहीं रहती। इस स्थिति में पिलर के आसपास कटाव (scour) की आशंका रहती है और सुरक्षा हेतु सतर्कता बढ़ानी पड़ती है।

सुपरस्ट्रक्चर की स्थापना के लिए भारी मशीनरी की आवश्यकता होती है, जिसे उच्च जल स्तर और तेज बहाव में चलाना मुश्किल हो जाता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरों की मानें तो मानसून में पुल निर्माण धीमा पड़ जाता है क्योंकि भारी जल प्रवाह निर्माण सामग्री बहा सकता है और कार्यस्थल असुरक्षित हो जाता है। सड़क कंक्रीट तैयार करने वाले प्लांट भी मॉनसून में बंद हो जाते हैं, जिससे जुड़ने वाले काम रुक जाते हैं। यह सब साहिबगंज–मनिहारी पुल पर भी लागू होगा, अगर गंगा का जलस्तर बढ़ा तो पिलरों की नींव सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण होगा।

DBL की आपदा के दौरान तैयारी

दिलीप बिल्डकॉन (DBL) का कहना है कि उसने निरंतर निर्माण बनाए रखने के लिए विशेष तैयारी की है। कंपनी नियमित रूप से गुणवत्ता परीक्षण और प्रगति रिपोर्ट संबंधित विभागों को भेजती है। DBL के मैनेजर भानु प्रताप सिंह ने बताया कि रेलवे से मेगा ब्लॉक मिलने पर रिकॉर्ड समय में 10 कॉम्पोजिट गार्डर सफलतापूर्वक लॉन्च किए गए, जिससे काम की गति बढ़ी। हालांकि, कंपनी इस परियोजना पर पिछले वर्षों में आयी प्राकृतिक आपदाओं से भी प्रभावित रही है। विशेषकर में यास चक्रवात के कारण निर्माण कार्य बाधित हुआ और इसकी समयसीमा बढ़ा दी गई थी।

दिसंबर 2025 की समयसीमा, कितनी यथार्थ?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जुलाई 2025 में कहा कि साहिबगंज–मनिहारी पुल का 77% काम पूरा हो चुका है और दिसंबर 2025 तक उद्घाटन संभव है। यह आंकड़ा पहले किए गए लक्ष्यों के अनुरूप आशाजनक दिखता है। लेकिन पिछले रुकावटों को देखते हुए जानकर इसे चुनौतीपूर्ण मानते हैं। पहले योजना थी कि चार वर्षों (2024) में पुल बनकर तैयार हो, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं के कारण काम आगे बढ़ गया है। वर्तमान में मानसून सक्रिय है और गंगा का पानी खतरनाक स्तर छू रहा है, ऐसे में शेष 23% कार्य दिसंबर तक पूरा करना कठिन और चुनौती भरा हो सकता है।

आईएमडी के अनुसार 2025 का मानसून सामान्य से अधिक वर्षा देगा, जिससे गंगा का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। भारी बारिश के दौरान पुल निर्माण में तकनीकी चुनौतियाँ बढ़ जाती हैं। ठेकेदार DBL ने आपदाओं के समय भी काम जारी रखने की कोशिश की है, लेकिन मौजूदा प्रगति (लगभग 77%) को देखते हुए दिसंबर 2025 की समयसीमा काफी महत्वाकांक्षी लगती है। सभी पक्षों की साझा रणनीति और कड़ी निगरानी के बीच ही इस महत्त्वपूर्ण पुल का सफल समापन संभव होगा।

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WASIM AKRAM
Author: WASIM AKRAM

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