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स्वास्थ्य तंत्र की खामियों पर उठे सवाल, सीएस ने दी सुधार की गारंटी
Sahibganj, 23 जुलाई: लदौनी गांव की 16 वर्षीय बदरी पहाड़िन की दर्दनाक मौत ने जिले के स्वास्थ्य तंत्र की हालत उजागर कर दी। पहाड़िया समुदाय की यह किशोरी इलाज के लिए खाट पर पैदल अस्पताल लाई गई थी, और मौत के बाद भी शव ले जाने को एंबुलेंस तक नहीं मिली। इस हृदयविदारक घटना के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। बुधवार को सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान ने स्वयं लदौनी गांव पहुंचकर मृतका के परिजनों से मुलाकात की और घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया।
गांव-गांव स्वास्थ्य सुविधा का वादा
सीएस ने लदौनी व पास के करम पहाड़ गांव का निरीक्षण किया और स्पष्ट कहा कि:
“अब ऐसी घटना दोहराई नहीं जाएगी। जहां एंबुलेंस नहीं पहुंच सकती, वहां वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी सहिया को निर्देश दिया गया है कि बीमार व्यक्ति को सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी होगी।”
सीएस ने स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों को यह भी निर्देश दिया कि गांवों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर सुविधा विकसित की जाए।
बदरी की कहानी: एक सवाल, एक सबक
21 जुलाई की रात, कजरा पहाड़िया की बेटी बदरी, ज़हर खाने के बाद गंभीर हालत में थी। एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण परिजनों ने उसे खाट पर डालकर कई किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुँचाया। लेकिन समय पर इलाज नहीं मिल पाया और 22 जुलाई को शाम चार बजे उसकी मौत हो गई। सबसे चुभने वाली बात यह रही कि मौत के बाद भी परिजनों को शव ले जाने के लिए कोई मोक्ष वाहन नहीं मिला, और उन्हें खाट पर ही बेटी का शव वापस लाना पड़ा।
कार्रवाई का भरोसा, लेकिन क्या बदलेगी तस्वीर?
सीएस ने इस पूरे मामले में जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। साथ ही कहा गया है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।
एक सवाल अभी भी बाकी है…
बदरी की जान भले न बच सकी हो, लेकिन उसकी मौत ने सिस्टम को हिला दिया है। सवाल यह है कि क्या यह झटका स्थायी सुधार में बदलेगा, या यह संवेदना कुछ दिनों की दौड़ तक सीमित रह जाएगी?
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