Sahibganj, 29 जुलाई: सदर अस्पताल साहेबगंज, जहां लोगों को राहत मिलनी चाहिए, वहां अब फ्री ऑपरेशन के नाम पर खुलेआम वसूली का खेल खेला जा रहा है। ताजा मामला एक गरीब विधवा महिला से ऑपरेशन के नाम पर ₹15,000 की अवैध वसूली का है, जिससे ऑपरेशन के के नाम पर वसूली की गयी और जब परिजनों ने विरोध किया, तो बिना इलाज किए भगा दिया गया।
पीड़िता सुकूम देवी, पति स्वर्गीय दिनेश साह, निवासी बरहेट संथाली, ने अपने साथ हुई इस अमानवीय हरकत की शिकायत साहिबगंज जिलाउपायुक्त से की है। महिला ने आवेदन में बताया कि उसे पेट दर्द की शिकायत थी, और अल्ट्रासाउंड में बच्चेदानी की समस्या सामने आई। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की जरूरत बताई। सूचना मिली कि एक NGO द्वारा सदर अस्पताल में निशुल्क ऑपरेशन किया जा रहा है। महिला का आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड अस्पताल में लिया गया, खून जांच हुई, अल्ट्रासाउंड बाहर से कराना पड़ा। जब सारी रिपोर्ट दे दी गई तो शाम चार बजे उसे ऑपरेशन बेड पर लिटा दिया गया। तभी NGO से जुड़े दलालों और स्टाफ ने 15,000 रुपये की डिमांड रख दी। मजबूरी में महिला ने पैसे दिए, पर बाहर जब उसके परिजनों ने आवाज उठाई तो न केवल ऑपरेशन रोक दिया गया, बल्कि महिला को अस्पताल से बिना इलाज के बाहर कर दिया गया। पैसे भी वापस नहीं किए गए।

पीड़िता का यह भी आरोप है कि 25 जुलाई को जिन अन्य महिलाओं का ऑपरेशन हुआ, सभी से इसी तरह पैसे वसूले गए। यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि सोची-समझी मिलीभगत का हिस्सा लगता है, जिसमें NGO पदाधिकारी, डॉक्टर और बिचौलिए शामिल हैं। सुकूम देवी ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने, वसूले गए ₹15,000 की वापसी तथा उसे सरकारी योजना के तहत निःशुल्क ऑपरेशन दिलाने की मांग की है। उन्होंने दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की भी अपील की है।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि इतनी बड़ी वसूली का मामला सामने तब आया जब पीड़िता ने शिकायत जिले के उपायुक्त से की, और स्वास्थ्य विभाग को इसकी भनक तक नहीं। मामले में किसी स्वास्थ्य अधिकारी का अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि अगर ऑपरेशन फ्री था तो पैसे किसने और क्यों ली? यदि ऑपरेशन के पहले ही पैसे मांगे गए थे, तो आयुष्मान कार्ड का क्या उपयोग हुआ? क्या सदर अस्पताल अब फ्री इलाज के नाम पर एक वसूली केंद्र बन गया है?
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