Sahibganj, 31 जुलाई: झारखंड में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सरकार ने यह साफ कर दिया है कि अवैध खनन के खिलाफ उसकी नीति जीरो टॉलरेंस की है। इसकी ताजा मिसाल जिले में सामने आई है, जहां झामुमो के पूर्व जिला अध्यक्ष शाहजहां अंसारी के खिलाफ तालझारी थाना में अवैध पत्थर खनन मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले में न सिर्फ मो. मुस्तकीम अंसारी बल्कि शाहजहां अंसारी, जो पूर्व में झामुमो जिला कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं, उन्हें भी आरोपी बनाया गया है। यह घटनाक्रम इस मायने में अहम है कि राज्य में झामुमो की ही सरकार है, और एक पूर्व जिलाध्यक्ष पर इस प्रकार की कार्रवाई यह दर्शाता है कि सरकार पार्टी लाइन से ऊपर उठकर कानून का पालन सुनिश्चित कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्राथमिकी के बाद से सियासी गलियारों में हलचल
पूर्व जिला अध्यक्ष के नाम पर एफआईआर दर्ज होने से राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। राजनैतिक जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई झामुमो द्वारा संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बढ़ती सख्ती को भी दर्शाती है।
सरकार का संदेश स्पष्ट: अवैध खनन में कोई छूट नहीं
पिछले कुछ वर्षों से साहिबगंज, राजमहल और बरहरवा जैसे क्षेत्रों में पत्थर खनन से जुड़े मामलों में कई बार अनियमितताएं सामने आई हैं। हालांकि इस बार जिस प्रकार से एक सत्ताधारी दल के पूर्व जिला प्रमुख को भी कानून के दायरे में लाया गया है, वह यह संकेत देता है कि राज्य सरकार अब खनन माफियाओं को किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं है, चाहे उनका राजनीतिक रसूख कुछ भी हो।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब अगला कदम, पुलिस और खनन विभाग की संयुक्त कार्रवाई होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आगे चलकर इस मामले में गिरफ़्तारी या परिसंपत्तियों पर कार्रवाई होती है, या फिर मामला केवल कागज़ों तक ही सीमित रह जाता है।
ज्ञात हो कि यह कार्रवाई अनुमंडल पदाधिकारी राजमहल के नेतृत्व में 23 जुलाई को किए गए एक संयुक्त औचक निरीक्षण के बाद की गई, जिसमें पाया गया कि तालझारी अंचल के बेकचुरी गांव में स्थित मो. मुस्तकीम अंसारी स्टोन वर्क्स नामक क्रशर प्लांट बिना वैध पर्यावरणीय स्वीकृति (CTO) के संचालित हो रहा था। इसमें शामिल लोगों के विरुद्ध झारखंड लघु खनिज समन्वय नियमावली 2004, झारखंड खनिज (अवैध खनन पर रोक, परिवहन और भंडारण) नियम, 2017, और वायु (प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की कई धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज़ की गयी है।
शाहजहां अंसारी जैसे वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्ति पर प्राथमिकी दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि झारखंड सरकार अवैध खनन के खिलाफ गंभीर है। यह कार्रवाई न केवल कानून व्यवस्था को स्थापित करने का प्रयास है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सत्ता में रहते हुए भी कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है।
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