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नीति आयोग के निर्देश पर “वोकल फॉर लोकल” अभियान के तहत शुरू हुई दो दिवसीय पहल
Pakur, 1 अगस्त: जिले में “वोकल फॉर लोकल” पहल को बढ़ावा देने के लिए शुक्रवार को बाजार समिति परिसर में ‘आकांक्षा हाट’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। नीति आयोग के निर्देशानुसार आयोजित इस दो दिवसीय आयोजन का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को प्रोत्साहन देना है। कार्यक्रम का उद्घाटन उप विकास आयुक्त महेश कुमार संथालिया, परियोजना निदेशक आईटीडीए अरुण कुमार एक्का, अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन, अनुमंडल पदाधिकारी साईमन मरांडी, जिला पंचायत राज पदाधिकारी प्रीतिलता मुर्मू, जिला योजना पदाधिकारी त्रिभुवन कुमार सिंह, जिला शिक्षा अधीक्षक अनीता पुरती, जिला परिषद उपाध्यक्ष अशोक कुमार भगत, सांसद प्रतिनिधि श्याम यादव, और विधायक प्रतिनिधि गोकुल अहमद समेत अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।
उप विकास आयुक्त ने कहा कि “आकांक्षा हाट का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, किसानों और स्टार्टअप्स को विपणन का अवसर प्रदान करना है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।” उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे इस हाट में आकर स्थानीय उत्पादों को खरीदें और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को सफल बनाएं। जिला परिषद उपाध्यक्ष अशोक भगत ने इस पहल को रोजगार और स्वावलंबन को बढ़ावा देने वाला बताया। सांसद प्रतिनिधि श्याम यादव ने जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह हाट स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका के अवसर लेकर आ रहा है।
स्थानीय प्रतिभा आत्मनिर्भर भारत की पहचान। आकांक्षा हाट, एक पहल आत्मनिर्भरता की ओर। ग्रामीण महिलाओं के लिए हुनर का मंच- आकांक्षा हाट।@NITIAayog @PMOIndia#Pmoindia#NITIAayog #AakankshaHaat#AakankshaHaat#Pakur #Jharkhand pic.twitter.com/sBBkVTKcwa
— DC PAKUR (@dcpakur) August 1, 2025
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने बाजार समिति परिसर में लगे विभिन्न विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया। इसमें कृषि, पशुपालन, सहकारिता, मत्स्य, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण और जेएसएलपीएस जैसे विभागों की भागीदारी रही। स्थानीय स्वयं सहायता समूहों, हस्तशिल्पियों, कृषि उत्पादकों और स्टार्टअप्स द्वारा सजाए गए स्टॉलों में पारंपरिक उत्पादों की खरीद-बिक्री के साथ-साथ प्रदर्शन भी किया गया।
उप विकास आयुक्त ने कहा:
“स्थानीय उत्पादों को खरीदकर हम न सिर्फ अपने इलाके की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाते हैं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी निभाते हैं। इन उत्पादों को जरूरत के अनुसार बदला भी जा सकता है, जो बड़े ब्रांडों में संभव नहीं।”
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