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राजनीतिक टकराव तेज, भाजपा ने उठाए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल, झामुमो ने दी पलटवार
Ranchi: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने रविवार को मरांडी के आरोपों को बौखलाहट और निराधार बताया।
मरांडी ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार में कुछ भ्रष्ट पुलिस अधिकारी मुख्यमंत्री की कार्यशैली की नकल करते हुए कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराने और उन्हें परेशान करने की नीति अपनाई, जिसका असर अब पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि खूँटी में पदस्थ एक दरोगा ने बिहार के बेगूसराय में अपने पैतृक जमीन विवाद को लेकर विरोधी पक्ष को झारखंड में अफीम की खेती के फर्जी मामले में फंसा दिया। मरांडी ने आरोप लगाया कि भ्रष्ट अफसर मुख्यमंत्री के संरक्षण में कानून से खिलवाड़ कर रहे हैं और गैर-संवैधानिक तरीके से कार्यरत डीजीपी ने इसे धंधा बना लिया है। उन्होंने कहा कि “दारोगा को सस्पेंड करना बस दिखावा है, ऐसे अफसरों को जेल भेजा जाना चाहिए ताकि पूरे राज्य में मिसाल कायम हो।”
झामुमो का पलटवार: मरांडी के आरोप झूठ और बौखलाहट का परिणाम
मरांडी के आरोपों पर झामुमो ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा नेता की बयानबाज़ी निराधार और राजनीतिक हताशा का नतीजा है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने शासनकाल में भ्रष्टाचार और जनविरोधी निर्णयों के प्रतीक रहे हों, उन्हें आज नैतिकता और कानून की बातें करना शोभा नहीं देता। पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पारदर्शिता, संवैधानिक मूल्यों और जनहित के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि “यहां किसी के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों और सबूतों के आधार पर होती है, न कि भाजपा शासन की तरह राजनीतिक दुर्भावना से। झामुमो नेता ने भाजपा के शासनकाल को याद करते हुए कहा कि उस समय पुलिस को विरोधियों को डराने और झूठे मुकदमे दर्ज करने का औज़ार बनाया गया था। “आज जब कानून अपना काम कर रहा है, भाजपा नेताओं को परेशानी हो रही है। विनोद पांडेय ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार या सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ सख्त निर्देश दिए हैं। अगर किसी अधिकारी ने गलती की है तो जांच और कार्रवाई होगी, लेकिन भाजपा की तरह फर्जी मुकदमे में फंसाने की परंपरा यहां नहीं है। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार जनता के विश्वास से बनी है और जनता के भरोसे पर खड़ी है, जबकि भाजपा अब झूठ और अफवाहों के सहारे राजनीति करने को मजबूर है।
राज्य की सत्ता और विपक्ष के बीच यह नया टकराव झारखंड में कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है। भाजपा जहां इसे “राजनीतिक प्रतिशोध और पुलिस के भ्रष्टाचार” का मुद्दा बना रही है, वहीं सत्ताधारी झामुमो सरकार अपने रुख पर कायम है कि राज्य में “कानून का राज” कायम है और कार्रवाई तथ्यों पर आधारित है।
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