Sahibganj: आरओबी आंदोलन की आग में झुलसेगी रेलवे की कमाई, रैक लोडिंग ठप होने पर रोज़ 2 करोड़ से अधिक का होगा नुकसान

Sahibganj: The railway's earnings will be hit hard by the ROB (Road Over Bridge) protest; a daily loss of over Rs. 2 crore is expected due to the disruption of rake loading.

Sahibganj: साहिबगंज में रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) निर्माण को लेकर उठे विवाद ने अब सीधे रेलवे के राजस्व पर बड़ा खतरा खड़ा कर दिया है। झारखण्ड में सत्तारूढ़ झामुमो के केंद्रीय सचिव सह प्रवक्ता पंकज मिश्रा द्वारा 15 जनवरी तक आरओबी टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं होने की स्थिति में 16 जनवरी से रेलवे रैक के जरिए पत्थर ढुलाई पूरी तरह ठप करने की चेतावनी के बाद रेलवे महकमे में चिंता बढ़ गई है।

साहिबगंज जिले से प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक पत्थर और गिट्टी के रेलवे रैक लोड किए जाते हैं। इन रैकों के माध्यम से होने वाली माल ढुलाई से रेलवे को प्रतिदिन लगभग दो करोड़ रुपये से अधिक का संभावित राजस्व प्राप्त होता है। आंदोलन के कारण यदि यह ढुलाई ठप होती है, तो रेलवे को रोज़ाना इसी अनुपात में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

साहिबगंज झारखंड का प्रमुख स्टोन चिप्स लोडिंग केंद्र है, जहां से बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के लिए नियमित रूप से रैक रवाना होते हैं। इन रैकों के बंद होने से न केवल रेलवे की मालभाड़ा आय प्रभावित होगी, बल्कि पूर्वी रेलवे के फ्रेट नेटवर्क और शेड्यूल पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। यदि आंदोलन कुछ दिनों तक भी चलता है, तो रेलवे को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है और वैकल्पिक मार्गों व स्रोतों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।

आरओबी निर्माण की मांग को लेकर प्रस्तावित इस आंदोलन को अब साहिबगंज के पत्थर व्यवसायियों का खुला समर्थन मिल गया है। मंगलवार को पंकज मिश्रा के साहिबगंज स्थित आवास पर शहर के नामचीन पत्थर व्यवसायियों की बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता चतुरानंद पांडे ने की। बैठक में सर्वसम्मति से 16 जनवरी से प्रस्तावित आंदोलन के समर्थन का निर्णय लिया गया।

व्यवसायियों ने स्पष्ट किया कि यदि आरओबी निर्माण कार्य तय समयसीमा तक शुरू नहीं होता है, तो रेलवे रैक के माध्यम से पत्थर ढुलाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। इस निर्णय के बाद रेलवे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि साहिबगंज से होने वाली स्टोन चिप्स ढुलाई रेलवे के लिए एक स्थायी और बड़े राजस्व स्रोत के रूप में जानी जाती है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 15 जनवरी तक आरओबी निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल होती है या फिर 16 जनवरी से शुरू होने वाला आंदोलन रेलवे को रोज़ाना करोड़ों रुपये के नुकसान की ओर धकेल देगा।

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WASIM AKRAM
Author: WASIM AKRAM

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