DMFT Sahibganj के बहीखातों में गड़बड़ी? 2022-23 की ऑडिट रिपोर्ट ने भी खोली वित्तीय अव्यवस्था की परतें

Irregularities in the accounts of DMFT Sahibganj? The 2022-23 audit report has also exposed layers of financial mismanagement.
  • फर्नीचर-फिक्स्चर पर लाखों खर्च, लेकिन फिक्स्ड एसेट रजिस्टर नदारद

Sahibganj: खनन प्रभावितों के कल्याण के लिए बनाए गए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट साहिबगंज का वित्तीय वर्ष 2022-23 का ऑडिट प्रतिवेदन एक ऐसा दस्तावेज बनकर सामने आया है, जिसने फंड के संचालन, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। ऑडिट रिपोर्ट बताती है कि डीएमएफटी का यह फंड न केवल अपने उद्देश्य से भटका, बल्कि इसके क्रियान्वयन में राजस्व रिसाव, बैंक प्रबंधन में लापरवाही, लेखा प्रणाली की कमजोरी और करोड़ों रुपये की संदिग्ध देनदारियां भी उजागर हुई हैं।

ऑडिट रिपोर्ट का सबसे गंभीर निष्कर्ष रेवेन्यू लीकेज (Revenue Leakage) से जुड़ा है। ऑडिटर ने स्पष्ट किया है कि खनिज रॉयल्टी के आधार पर डीएमएफटी को मिलने वाली राशि की सही गणना के लिए जिला प्रशासन के पास कोई ठोस और पारदर्शी तंत्र मौजूद नहीं है। लीज-वार रॉयल्टी, डीएमएफटी देयता और वास्तविक वसूली के आंकड़ों का मिलान ही नहीं किया गया, जिससे यह तय करना असंभव हो गया कि जिले को वास्तव में कितना डीएमएफटी फंड मिलना चाहिए था। यह स्थिति संभावित रूप से करोड़ों रुपये के नुकसान की ओर संकेत करती है।

रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि डीएमएफटी की बड़ी राशि लंबे समय तक करंट अकाउंट में पड़ी रही, जबकि नियमानुसार इसे सेविंग अकाउंट में रखा जाना चाहिए था। इस लापरवाही के कारण जिले को लाखों रुपये के ब्याज का नुकसान उठाना पड़ा। ऑडिटर ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि यह राशि सेविंग अकाउंट में रखी जाती, तो सार्वजनिक धन पर अतिरिक्त ब्याज अर्जित किया जा सकता था।

लेखा प्रबंधन की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। डीएमएफटी मद से फर्नीचर और फिक्स्चर समेत कई परिसंपत्तियों पर खर्च होने के बावजूद फिक्स्ड एसेट रजिस्टर का संधारण नहीं किया गया। इसके साथ ही किसी भी परिसंपत्ति पर मूल्यह्रास का प्रावधान नहीं किया गया, जिससे बैलेंस शीट वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाती। ऑडिटर ने इसे बुनियादी लेखा सिद्धांतों का उल्लंघन माना है।

ऑडिट रिपोर्ट में एक और बड़ा मामला PReJHA (Pan IIT Alumni Reach for Jharkhand) को दिए गए 3.50 करोड़ रुपये के ऋण का है। यह ऋण वर्ष 2018-19 में दिया गया था, लेकिन 2022-23 तक इसकी वापसी नहीं हुई। खनन प्रभावितों के लिए बने कल्याणकारी फंड से ऋण देना और फिर वर्षों तक उसकी वसूली न होना, डीएमएफटी की वित्तीय अनुशासनहीनता को उजागर करता है।

टैक्सेशन के स्तर पर भी गड़बड़ियां सामने आई हैं। ऑडिट के अनुसार कुछ निर्माण कार्यों में गलत जीएसटी दर से भुगतान किया गया, जिससे सरकारी धन का अनावश्यक नुकसान हुआ। इसके अलावा कोविड काल के दौरान किए गए कुछ खर्चों का समायोजन अब तक लंबित पाया गया है, जो वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि डीएमएफटी के खातों का संधारण अब तक डबल एंट्री सिस्टम के तहत नहीं किया गया। ऑडिटर ने इसे आधुनिक वित्तीय प्रबंधन के लिहाज से गंभीर कमी बताया है और स्पष्ट रूप से सुझाव दिया है कि खातों को डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली में लाया जाए।

इन तमाम खामियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब डीएमएफटी साहिबगंज में करोड़ों रुपये का फंड संचालित हो रहा था, तब इसकी निगरानी और जवाबदेही कहां थी। ऑडिट रिपोर्ट यह संकेत देती है कि नियमों और दिशा-निर्देशों की अनदेखी कोई एक-दो चूक नहीं, बल्कि व्यवस्थागत समस्या बन चुकी थी।

अब जब 2022-23 की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक हो चुकी है, तो यह सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी है। खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या इन गंभीर आपत्तियों पर कार्रवाई होगी, क्या बकाया राशि की वसूली की जाएगी और क्या डीएमएफटी फंड को उसके मूल उद्देश्य खनन प्रभावितों के वास्तविक कल्याण की ओर वापस लाया जाएगा।

यदि इन सवालों का जवाब नहीं मिला, तो यह रिपोर्ट केवल कागजों में दर्ज एक और चेतावनी बनकर रह जाएगी, और खनन प्रभावितों के हिस्से फिर वही निराशा आएगी, जिसके खिलाफ डीएमएफटी की स्थापना की गई थी।

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WASIM AKRAM
Author: WASIM AKRAM

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