Sahibganj: पाकुड़ (Pakur) और (Sahibganj) जिले में रेल विकास की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का स्वर अब और तेज होता नजर आ रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय सह प्रवक्ता पंकज मिश्रा (Pankaj Mishra) के आह्वान पर 16 जनवरी से साहिबगंज और पाकुड़ से रेलवे रैक के माध्यम से होने वाली पत्थर ढुलाई पूरी तरह ठप करने की घोषणा के बाद रेलवे महकमे में चिंता बढ़ गई है। इसी कड़ी में सोमवार को पंकज मिश्रा के साहिबगंज स्थित कार्यालय में पाकुड़ जिले के पत्थर व्यवसायियों के साथ एक विशेष बैठक हुई, जिसमें व्यवसायियों ने सर्वसम्मति से आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया।
बैठक में पत्थर व्यवसायियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्षों बाद संताल परगना को ऐसा नेतृत्व मिला है, जो निजी स्वार्थ और दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर वास्तविक रेल विकास के मुद्दे को जनता की आवाज बना रहा है। व्यवसायियों ने निर्णय लिया कि रेल रैक से पत्थर ढुलाई के लिए इंडेंट लगाना तत्काल प्रभाव से बंद किया जाएगा और इस आशय की सूचना रेलवे के वरीय अधिकारियों को भी दी जाएगी। साथ ही यह भी तय हुआ कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 16 जनवरी से रैक लोडिंग पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।
पंकज मिश्रा ने कहा कि
यह आंदोलन किसी व्यक्ति या पार्टी विशेष के लिए नहीं, बल्कि जनता की जायज मांगों के समर्थन में है। उन्होंने दोहराया कि साहिबगंज और पाकुड़ से प्रतिदिन रैक लोडिंग के जरिए रेलवे को करीब 10 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने के बावजूद क्षेत्र को लगातार उपेक्षित रखा गया है। रेलवे यहां से राजस्व तो ले रही है, लेकिन विकास का लाभ अन्य जिलों को दिया जा रहा है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
Pakur के पत्थर व्यवसायियों संग संथाल के चाणक्य पंकज मिश्रा के Sahibganj में बैठक से रेलवे की बढ़ी चिंता.
मांगें पूरी नहीं हुई तो रेलवे को प्रतिदिन करोड़ो के राजस्व का होगा नुकशान.@drmmalda @drmhowrah @RailMinIndia @EasternRailway pic.twitter.com/SCOnECoLeQ
— WM 24X7 NEWS (@wm24x7newz) January 5, 2026
उन्होंने बताया कि इससे पहले 23 दिसंबर को साहिबगंज जिले के पत्थर व्यवसायियों के साथ भी बैठक हो चुकी है, जिसमें वहां के व्यवसायियों ने भी शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन किया था। मिश्रा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि मार्च-अप्रैल तक रेल विकास से जुड़ी मांगों को धरातल पर नहीं उतारा गया, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
रेल विकास को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से मालदा रेल डिवीजन के डीआरएम को सौंपे गए ज्ञापन में साहिबगंज में पूर्वी और पश्चिमी रेलवे फाटकों पर आरओबी निर्माण, भागलपुर से चलने वाली ट्रेनों का विस्तार साहिबगंज तक करने, कोरोना काल में बंद की गई अपर इंडिया एक्सप्रेस को पुनः चालू करने, दिल्ली के लिए ट्रेनों की संख्या बढ़ाने, साहिबगंज-हावड़ा इंटरसिटी में एसी कोच तथा वनांचल एक्सप्रेस में एसी फर्स्ट क्लास की सुविधा देने की मांग की गई थी। इसके अलावा बेंगलुरु, सूरत और मुंबई के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने की भी मांग शामिल है।
वहीं पाकुड़ जिले के लिए पटना और दिल्ली तक सीधी ट्रेन सेवा, शताब्दी एक्सप्रेस, वंदे भारत एक्सप्रेस और बेंगलुरु जाने वाली ट्रेनों का ठहराव पाकुड़ स्टेशन पर देने जैसी मांगों को प्रमुखता से रखा गया है। आंदोलन को पत्थर व्यवसायियों का खुला समर्थन मिलने के बाद अब यह स्पष्ट है कि यदि रेलवे ने जल्द पहल नहीं की, तो साहिबगंज और पाकुड़ में रेल परिचालन एवं राजस्व पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
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