Pakur: न्यायिक व्यवस्था ने जब अपना काम पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाते हुए हत्या के एक मामले में दो अभियुक्तों को दोषी ठहराया, ठीक उसी पल पाकुड़ पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था ने भी अपना अलग ही काम दिखा दिया। परिणाम, दोष सिद्ध होते ही दोनों अभियुक्त पुलिस की आंखों में धूल झोंकते हुए फरार हो गए।
यह घटनाक्रम किसी फिल्मी सीन से कम नहीं रहा, जहां अदालत का फैसला आते ही पुलिस पहरा मानो चाय ब्रेक पर चला गया। माननीय न्यायालय ने तो कानून के अनुसार फैसला सुनाया, सवाल यह है कि फैसला सुनते समय अभियुक्तों की निगरानी किस भरोसे छोड़ी गई थी?
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही अदालत ने दोष सिद्ध किया, वैसे ही अभियुक्तों ने स्थिति का पूरा लाभ उठाया और पुलिस सुरक्षा को चकमा देकर फरार हो गए। यह वही पुलिस है, जो आम नागरिक को हेलमेट और कागजात के लिए किलोमीटर भर दौड़ा लेती है, लेकिन दोषी अभियुक्तों के मामले में सुस्त रवैया दिखा बैठी।
घटना की जानकारी मिलते ही पाकुड़ जिला पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए फरार अभियुक्तों की शीघ्र गिरफ्तारी के निर्देश जारी किए। सभी थानों को अलर्ट मोड में डाल दिया गया है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी का दावा भी किया जा रहा है। सीमावर्ती इलाकों में भी निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है। हालांकि, अभियुक्त जब फरार हो रहे थे, उस वक्त यह निगरानी कहां थी, इस पर पुलिस खामोश है।
पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों, स्थानीय सूचनाओं और पूरी कोशिश के भरोसे अभियुक्तों की तलाश में जुटी है। प्रशासन का कहना है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। लेकिन आम लोगों के बीच चर्चा कुछ और ही है, अगर दोष सिद्ध होने के बाद भी अभियुक्त पुलिस अभिरक्षा से भाग जाएँ, तो पुलिस सुरक्षा व्यवस्था आखिर किस काम की?
इस पूरे मामले ने यह तो साफ कर दिया है कि न्यायालय ने अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाई, मगर पुलिस की व्यवस्था ने एक बार फिर खुद को कठघरे में खड़ा कर लिया है। अब देखना यह होगा कि फरार अभियुक्त पहले मिलते हैं या पुलिस की जवाबदेही।
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