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बिना पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट CBI की जांच टीम ने किया पत्थर खनन क्षेत्र का दौरा
Sahibganj: अवैध खनन की जांच के लिए साहिबगंज जिले के नींबू पहाड़ पहुंचे सीबीआई के जांच अधिकारी खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं। खनन क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान पांच सदस्यीय सीबीआई टीम के द्वारा खान सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीबीआई की टीम ने जांच के दौरान पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) जैसे सेफ्टी हेलमेट, सेफ्टी शू, रिफ्लेक्टिव जैकेट एवं अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग नहीं किया गया, जबकि खनन क्षेत्र को कानूनन उच्च जोखिम वाला कार्यस्थल माना जाता है।
खान सुरक्षा से जुड़े नियमों के अनुसार, चाहे खदान चालू हो या बंद, खनन क्षेत्र में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर सुरक्षा मानक समान रूप से लागू होते हैं। माइंस एक्ट, 1952 और उसके अधीन बने नियम स्पष्ट करते हैं कि खदान में निरीक्षण, सर्वेक्षण या जांच के दौरान भी सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य है। इन प्रावधानों का उद्देश्य केवल श्रमिकों की सुरक्षा नहीं, बल्कि निरीक्षण करने वाले अधिकारियों और आगंतुकों की जान की रक्षा भी है।
इसी तरह खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के दिशा-निर्देशों में साफ कहा गया है कि पत्थर खदानों में अचानक चट्टान गिरने, फिसलन, जलभराव और भारी मशीनों की मौजूदगी जैसे जोखिम बने रहते हैं। ऐसे में बिना पीपीई खनन क्षेत्र में प्रवेश करना गंभीर सुरक्षा चूक के साथ-साथ कानून का उल्लंघन भी माना जाता है। नियमों के अनुसार, खनन क्षेत्र में प्रवेश से पहले यह सुनिश्चित करना स्थानीय खनन प्रशासन की वैधानिक जिम्मेदारी होती है कि सभी आगंतुक निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें।
नींबू पहाड़ का मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि यहां अवैध खनन की जांच पहले ही करोड़ों रुपये के कथित घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है। ऐसे में जांच एजेंसी और जिला प्रशासन से यह अपेक्षा की जाती है कि वे खान सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए जांच करें। लेकिन सुरक्षा मानकों की इस अनदेखी पर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि क्या नियम केवल आम लोगों के लिए हैं? क्या अधिकारी नियमों से ऊपर हैं?
डीजीएमएस के खान सुरक्षा विशेषज्ञ का कहना है कि पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन रक्षक व्यवस्था है। जांच जितनी जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि जांच के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। इसीलिए खान सुरक्षा नियमों का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है।
मामले में साहिबगंज जिला खनन पदाधिकारी कृष्णा कुमार किस्कू से प्रतिक्रिया जानने हेतु संपर्क किया गया लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई।
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