रैक रोको से रेलवे को तगड़ा झटका: Sahibganj-Pakur में ठप हुई पत्थर लोडिंग, रोज़ाना करोड़ों का नुकसान

Rail blockade deals a major blow to railways: Stone loading halted in Sahibganj-Pakur, resulting in daily losses of crores of rupees.

Sahibganj/Pakur: साहिबगंज और पाकुड़ जिले में रेलवे से जुड़े विकासात्मक मांगों को लेकर झामुमो के केंद्रीय सचिव सह प्रवक्ता पंकज मिश्रा के नेतृत्व में पत्थर व्यवसायियों द्वारा शुक्रवार से शुरू किया गया रैक लोडिंग बंद आंदोलन अब रेलवे के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। आंदोलन के पहले ही दिन साहिबगंज मालगोदाम, करमटोला, मिर्जाचौकी, सकरीगली, तालझारी, तीनपहाड़, बाकुड़ी और बरहरवा सहित पाकुड़ जिले के सभी प्रमुख रैक लोडिंग प्वाइंटों पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। कई स्थानों पर रेलवे द्वारा रैक भेजे जाने के बावजूद एक भी रैक की लोडिंग नहीं हो सकी। न पत्थर चिप्स गिराए गए और न ही कोई श्रमिक लोडिंग के लिए पहुंचा। मजबूरन रेलवे को खाली रैक वापस लौटाने पड़े, जबकि पहले से बुक किए गए इंडेंट भी व्यवसायियों ने वापस ले लिए। इससे रेलवे की परिचालन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई।

रेलवे सूत्रों के अनुसार साहिबगंज-पाकुड़ जिले से प्रतिदिन 13 से 15 रैक की लोडिंग होती थी। रैक लोडिंग बंद होने से रेलवे को प्रतिदिन लगभग 8 से 10 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका सीधा असर रेलवे की माल ढुलाई योजना, समय प्रबंधन और राजस्व लक्ष्य पर पड़ेगा।

इस पूरे आंदोलन के पीछे झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सचिव सह प्रवक्ता पंकज मिश्रा की रणनीति को लोग चाणक्य नीति के रूप में देख रहे हैं। वर्षों से चले आ रहे रेल रोको, धरना और प्रदर्शन के बजाय इस बार बिना ट्रैक जाम किए, बिना कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए, सीधे रेलवे की आर्थिक नस पर प्रहार किया गया है। जानकारों का कहना है कि यह ऐसा आंदोलन है, जिसमें न तो आम जनता को सड़क पर उतरना पड़ा और न ही आंदोलनकारियों पर किसी तरह के मुकदमे की आशंका बनी, लेकिन असर बेहद गहरा और त्वरित दिख रहा है।

व्यवसायियों का साफ कहना है कि साहिबगंज और पाकुड़ रेलखंड से रेलवे को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है, लेकिन बदले में क्षेत्र को बुनियादी रेल सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। पाकुड़ से दिल्ली या पटना के लिए एक भी सीधी ट्रेन नहीं है। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक पाकुड़ से साहिबगंज के लिए कोई ट्रेन उपलब्ध नहीं रहती। साहिबगंज के पूर्वी और पश्चिमी रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का अभाव, साहिबगंज-पाकुड़ रेलखंड होकर टाटानगर के लिए ट्रेन सेवा, भागलपुर से चलने वाली ट्रेनों का साहिबगंज तक विस्तार, वाशिंग पिट का निर्माण, यात्री सुविधाओं में बढ़ोतरी और लंबी दूरी की ट्रेनों की मांग वर्षों से लंबित है। इन्हीं मांगों को लेकर रैक लोडिंग बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

व्यवसायियों ने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत या व्यापारिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि जिले के समग्र विकास के लिए लिया गया है। उनका कहना है कि जब तक क्षेत्र का विकास नहीं होगा, तब तक व्यापार का कोई अर्थ नहीं रह जाता। यह लड़ाई सिर्फ पत्थर व्यवसाय की नहीं, बल्कि पूरे साहिबगंज-पाकुड़ क्षेत्र के भविष्य की है।

आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। झामुमो जिला अध्यक्ष अरुण सिंह ने इसे पूर्व नियोजित और पूरी तरह सफल आंदोलन बताते हुए कहा कि यह जिले के विकास से जुड़ा सवाल है। वहीं शहर के बुद्धिजीवी, समाजसेवी और आम नागरिक भी इस आंदोलन को अभूतपूर्व बताते हुए समर्थन जता रहे हैं। लोगों का कहना है कि पहली बार रेलवे के खिलाफ ऐसा आंदोलन देखने को मिल रहा है, जिसमें टकराव नहीं, बल्कि रणनीति के जरिए दबाव बनाया गया है।

पंकज मिश्रा ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला केवल पत्थर व्यवसाय का नहीं, बल्कि साहिबगंज और पाकुड़ के विकास से जुड़ा है। जब तक रेलवे स्थानीय समस्याओं का ठोस समाधान नहीं करता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

उनकी इस चाणक्य नीति की क्षेत्र में खुलकर सराहना हो रही है और लोग इसे विकास के लिए अपनाई गई सबसे प्रभावी रणनीति बता रहे हैं।

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WASIM AKRAM
Author: WASIM AKRAM

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