Sindega: झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीनी स्तर पर महिलाओं के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव ला रही हैं, इसकी एक सशक्त मिसाल सिमडेगा जिले से सामने आई है। यहां जलडेगा प्रखंड के टाटी पंचायत अंतर्गत फिरका गांव की गंझू टोली निवासी मीली सोरेंग ने मुख्यमंत्री मंईयाँ सम्मान योजना से प्राप्त सम्मान राशि को केवल खर्च करने के बजाय आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बना दिया है।
मीली सोरेंग ने योजना के तहत मिली 2500 रुपये की सहायता राशि को बचत और सहयोग के जरिए आगे बढ़ाया और ऊषा कंपनी की दो सिलाई मशीनें खरीदकर अपने परिवार की आजीविका को नया रास्ता दिया। लगभग 19 हजार रुपये की लागत से खरीदी गई इन मशीनों के माध्यम से उन्होंने अपने पति छूनू सोरेंग के साथ सिलाई कार्य शुरू किया, जिससे न सिर्फ घरेलू जरूरतें पूरी हो रही हैं, बल्कि भविष्य में स्वरोजगार के अवसर भी बनते नजर आ रहे हैं।
मीली सोरेंग की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि सरकारी योजनाओं की राशि का सही और रचनात्मक उपयोग किया जाए, तो सीमित सहायता भी परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती है। उनका प्रयास आज पूरे राज्य में महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है और प्रशासन स्तर पर भी इसकी सराहना हो रही है।
जिले की उपायुक्त कंचन सिंह ने मीली सोरेंग के उदाहरण को सराहनीय बताते हुए कहा कि मंईयाँ सम्मान योजना की राशि का इस तरह सदुपयोग कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उन्होंने जिले की अन्य लाभार्थी महिलाओं से भी अपील की कि वे इस राशि को आयवर्धक कार्यों में लगाएं।
वहीं जलडेगा प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री मंईयाँ सम्मान योजना का मूल उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। मीली सोरेंग ने जिस दूरदर्शिता के साथ योजना की राशि का उपयोग कर स्वरोजगार की शुरुआत की है, वह पूरे प्रखंड के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग ही उनकी सफलता का प्रमाण होता है और मीली सोरेंग की पहल समाज को यही संदेश देती है कि सम्मान राशि को सम्मान के साथ सार्थक दिशा दी जाए।
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