- कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की सरकारी दवा इनके पास है उपलब्ध
- झोलाछाप डॉक्टर के क्लिनिक में उपलब्ध है सरकारी अस्पताल से ज़्यादा सुविधा
- स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने में असमर्थ
साहिबगंज। साहिबगंज जिले के गांव-गांव में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। चाय की गुमटियों जैसी दुकानाें में झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इनमे से कुछ झोलाछाप डॉक्टर उल्टी, दस्त, खांसी, बुखार का इलाज करते करते अब खुदको सर्जन और विशेषज्ञ भी समझने लगे हैं और गंभीर बिमारियों का इलाज कर रहे हैं। जब ये डॉक्टर इलाज करने में असफल हो जाते हैं और मरीज की हालत बिगड़ती है तो आनन फानन में जिला अस्पताल या पड़ोसी राज्य भेज देते हैं। जिले के दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर समुचित सुविधाएं नहीं हैं। इसका फायदा सीधे तौर पर ऐसे झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला जिले के राधानगर थाना क्षेत्र का है, एक कम्पाउण्डर जो खुदको डॉक्टर बता कर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज करने का दावा कर रहा है। उक्त डॉक्टर के पास कैंसर के इलाज की सरकारी दवाईयां भी उपलब्ध है। इसके अलावे उक्त डॉक्टर द्वारा अपने निजी आवास स्थित क्लिनिक में मरीजों को खून चढाने, बेहोश करने, ऑक्सीजन, सर्जरी करने इत्यादि की पूरी व्यवस्था है। आये दिन सरकारी अस्पतालों में कुछ ग्रुप के ब्लड की कमी देखी जाती है, लेकिन इस डॉक्टर के पास हर ग्रुप का ब्लड उपलब्ध रहता है।

- बिना लाइसेंस के दवाओं का भंडारण भी करते हैं डॉक्टर
झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा बिना पंजीयन के एलोपैथी चिकित्सा व्यवसाय ही नहीं किया जा रहा है। बल्कि बिना ड्रग लाइसेंस के दवाओं का भंडारण व विक्रय भी अवैध रूप से किया जा रहा है। दुकानों के भीतर कार्टून में दवाओं का अवैध तरीके से भंडारण रहता है।
- स्वास्थ्य विभाग नहीं करता कार्रवाई
झोलाछाप डॉक्टरों की वजह से अब तक कई लोगों की असमय जान चली गई है। लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने स्थाई तौर पर झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं की।
- केस बिगड़ने पर अस्पताल रैफर कर देते हैं मरीज
बीते कुछ वर्षों से फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों की वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में कोई मात्र फर्स्ट एड का डिग्रीधारी हैं तो कोई अपने आप को कैंसर का इलाज करने वाला बता रहा है। इनके निजी क्लीनिकों में लगभग सभी गंभीर बीमारियों का इलाज धड़ल्ले से किया जा रहा है। कुछ डॉक्टरों ने तो अपनी क्लिनिक में ही ब्लड जांच, यूरीन जांच इत्यादि की सुविधा भी कर रखी है।

ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि सरकारी सप्लाई की कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज की दवाइयां और इंजेक्शन ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों तक कैसे पहुँचते हैं? वे कौन लोग हैं जो इन झोलाछाप डॉक्टरों को ब्लड उपलब्ध करवाते हैं? जिला प्रशासन कब ऐसे फ़र्ज़ी झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई करेगी?
झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं और जिले के सिविल सर्जन निजी क्लिनिक, मीटिंग्स और सरकारी अस्पतालों के निरिक्षण में ही व्यस्त हैं। क्या उनकी यह जिम्मेदारी नहीं की गैर कानूनी और फ़र्ज़ी तरीके से काम कर रहे ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों को चिन्हित कर कार्रवाई करें? साथ ही जिले के ड्रग विभाग को भी नींद से जागकर बिना ड्रग लाइसेंस के दवाओं का भण्डारण करने वालों पर शख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
- क्या कहते हैं जिले के सिविल सर्जन?
कैंसर की दवा ऐसे डॉक्टरों के पास पहुंचना गंभीर विषय है, अभिलम्ब इसकी जाँच कर कार्रवाई की जाएगी: प्रवीण कुमार संथालिया, सिविल सर्जन, साहिबगंज
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