Sahibganj: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली, झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची और जिला विधिक सेवा प्राधिकार, साहेबगंज के द्वारा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, साहेबगंज अखिल कुमार के मार्गदर्शन में साहेबगंज सदर प्रखण्ड मुख्यालय के सभागार में “विधान से समाधान” के तहत विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसके तहत महिलाओं की सुरक्षा के कानूनी प्रावधानों और योजनाओं से जुड़ी जानकारी प्रदान की गई।
प्राधिकार के सचिव विश्वनाथ भगत ने इस कार्यक्रम में विस्तार से नालसा, झालसा और राष्ट्रीय महिला आयोग की सहभागिता से जिले के 13 प्रखंडों में महिला सशक्तिकरण एवं विकास से जुड़े विषय पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है | उन्होंने महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर विभिन्न कानूनी प्रावधानों और पक्रियाओं के बारे में उपस्थित महिला समूह को बताया। उन्होंने महिलाओं को टेली ला के बारे में भी जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि किसी भी महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का पूरा अधिकार है।

अधिवता श्री प्रेमनाथ तिवारी ने महिला कल्याण विभाग की योजनाओं के बारे में जानकारी दी। एक महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नही किया जा सकता। किसी खास मामले में एक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही ये संभव है। किसी मामले में अगर आरोपी एक महिला है तो उस पर की जाने वाली कोई भी चिकित्सा जांच प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की उपस्थिति में ही की जानी चाहिए।
इस कार्यक्रम में एलएडीसी के चीफ अरविन्द गोयल ने भी महिलाओं के उत्थान और विकास के लिए कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए प्रावधानों को बारे में विस्तार से बताया। इस मौके पर कई विभागों के प्रमुख भी उपस्थित थे। नालसा द्वारा जारी सेवाओं तथा टोलफ्री नंबर 15100 के लाभ के बारे में विस्तार से बताया।
महिला अधिवक्ता रेणुका कुमारी ने घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार की जानकारी देते हुए कहा कि यह अधिनियम मुख्य रूप से पति पुरूष लिव इन पार्टनर या फिर घर में रह रही किसी भी महिला जैसे मां या बहन पर की गयी घरेलू हिंसा से सुरक्षा करने के लिए बनाया गया है। आप या आपकी ओर से कोई भी शिकायत दर्ज करा सकता है। उन्होनें कहा कि समान पारिश्रमिक अधिनियम के अनुसार अगर बात वेतन मजदूरी की हो तो लिंग के आधार पर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जा सकता है। काम पर हुए यौन उत्पीड़न अधिनियम के अनुसार आपको यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का पूरा अधिकार है। शिकायत पर तत्काल करवाई होगी। यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को नाम न छापने देने का अधिकार है। अपनी गोपनीयता की रक्षा करने के लिए यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिला अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में दर्ज करा सकती है।
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