Ranchi: 24 साल के झारखंड (Jharkhand) के राजनीतिक सियासत का सफर काफी रोमांचक रहा है। इन्हीं में एक रोमांचक तथ्य ये है कि यहां अब तक जो मुख्यमंत्री बना है, उसे चुनावी रणक्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा है। चाहे वो झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) हो या दिशोम गुरू शिबू सोरेन (Shibu Soren) या फिर भाजपा के कद्दावर नेता अर्जुन मुंडा (Arjun Munda), हेमंत सोरेन (Hemant Soren) और निर्दलीय मुख्यमंत्री बनकर इतिहास बनाने वाले मधु कोड़ा (Madhu Koda) या 5 साल का पूरा कार्यकाल संभालने वाले रघुबर दास (Raghubar Das)। जनता की अदालत में सबको शिकस्त मिली है।
शिक्षक से राजनेता बने बाबूलाल मरांडी वर्ष 2000 में झारखंड अलग राज्य बनने पर राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने। लेकिन एनडीए (NDA) की सहयोगी जदयू (JDU) के हस्तक्षेप के कारण 2003 में उन्हें इस्तीफा देकर अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री पद सौंपना पड़ा। 2006 में पार्टी से मनमुटाव के बाद भाजपा (BJP) से इस्तीफा देकर नई पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (JVM) बनाया और 2014 में गिरिडीह और धनवार से चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन दोनों जगहों से उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा।
18 मार्च 2003 से 2 मार्च 2005 तक और 12 मार्च 2005 से 18 सितंबर 2006 तक मुख्यमंत्री रहे अर्जुन मुंडा भी 2014 के विधानसभा चुनाव में अपनी परंपरागत सीट खरसावां से झामुमो के दशरथ गागराई से हार गए। जबकि देश की राजनीति में इतिहास बनाने वाले निर्दलीय विधायक के रूप में 23 महीने तक मुख्यमंत्री रहने वाले मधु कोड़ा को 2014 के विधानसभा चुनाव में झामुमो के निरल पूर्ति ने शिकस्त दी।
2013 में मुख्यमंत्री बने हेमंत सोरेन 2014 में दो सीट बरहेट और दुमका से चुनाव लड़े, जिसमें उन्हें बरहेट से जीत मिली और उन्होंने भाजपा के हेमलाल मुर्मू को हराया, लेकिन दुमका से भाजपा के ही लुईस मरांडी ने शिकस्त दे दी।
2005 में 10 दिन के लिए मुख्यमंत्री की गद्दी संभालने वाले शिबू सोरेन 2009 के उपचुनाव में तमाड़ से झारखंड पार्टी के प्रत्याशी और जमशेदपुर निवासी गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर से हार गए।
2014 में रघुबर दास ने झारखंड की कमान संभाली। लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से बागी हुए सरयू राय ने निर्दलीय चुनाव लड़के 1995 से 2019 तक जमशेदपुर पूर्वी से विधायक रहे रघुबर दास को उनके ही घर में पराजित कर दिया।
ऐसे में अबकी बारी झामुमो (JMM) छोड़ भाजपा (BJP) में शामिल हुए चंपई सोरेन (Champai Soren) की भी है। क्या ये इतिहास दुहरायेंगे या इतिहास बनेंगे, यह 23 नवंबर को पता चलेगा? मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद 2 फ़रवरी 2024 से 3 जुलाई 2024 तक चंपई सोरेन ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थी। हेमंत सोरेन से जेल वापसी के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। सरायकेला सीट पर चंपई का सीधा मुकाबला झामुमो के गणेश महली (Ganesh Mahali) से है।
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