Sahibganj/ 5 May 2025: अपराध का चेहरा धीरे-धीरे बदल रहा है। नकाबपोश अपराधियों की वारदातों में अचानक वृद्धि हुई है, जिससे पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। अपराधी अब CCTV कैमरों और पहचान से बचने के लिए चेहरा ढंककर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे न केवल अपराध की जांच प्रभावित होती है, बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
साहिबगंज जिले में भी बीते कुछ महीनों में अपराध के कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जहाँ अपराधियों ने अपने चेहरे ढँके हुए थे, जिससे पुलिस के लिए उनकी पहचान कर पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
रविवार को जिला मुख्यालय के सबसे व्यस्त सड़क कॉलेज रोड स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान पर शाम करीब 8 बजे बेख़ौफ़ नकाबपोश 2 बदमाशों ने दूकानदार को गोली मार दी और मौके से फरार हो गए। घटना के बाद से इलाके में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों के बीच नकाबपोश अपराधियों का खौफ साफ देखा जा सकता है। साहिबगंज शहर के एक व्यवसायी कहते हैं कि “अब तो दिन में भी डर लगता है। चेहरे ढंके हुए लोग आते हैं तो दिल बैठ जाता है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए।”

नकाबपोश अपराधियों से निपटना पुलिस के लिए भी दोहरी चुनौती है। एक तो नकाब पहनकर अपराध करना पुलिस के लिए केवल पहचान की ही नहीं, बल्कि साक्ष्य जुटाने की भी चुनौती खड़ी करता है। दूसरा वे अक्सर योजनाबद्ध तरीके से सीमावर्ती इलाकों से भाग जाते हैं। साहिबगंज जिला झारखंड-बिहार-बंगाल की अन्तर्राज्जीय सीमा पर स्थित है, जो की अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन जाता है।
- सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी साहिबगंज पुलिस
नकाबपोश अपराधियों की बढ़ती घटनाओं के बीच जिला पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में प्रयासरत है। जिला पुलिस प्रशासन ने जनता से भी सहयोग की अपील की है। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने को कहा गया है। साथ ही सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि लोग सतर्क और सजग रहें। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि जिले को सुरक्षित और अपराधमुक्त बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
नकाबपोश अपराधियों के बढ़ते मामलों ने साहिबगंज पुलिस को नई रणनीति बनाने के लिए मजबूर कर दिया है। अपराध की यह बदलती तस्वीर न सिर्फ पुलिस, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि सुरक्षा के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर तकनीकी और सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। अपराधियों के इस नए पैटर्न से निपटने के लिए तकनीकी उपकरणों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत निगरानी प्रणालियों की जरूरत महसूस की जा रही है।
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