Panipath: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI अब युवाओं को आतंक की राह पर ले जाने के लिए डिजिटल नेटवर्किंग का हथियार बना रही है। हरियाणा के पानीपत में गिरफ्तार नोमान इलाही की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 17 साल की उम्र में वह पाकिस्तान गया, ब्रेनवॉश हुआ और फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारत में जासूसी के काम में लग गया। नोमान इलाही, जो उत्तर प्रदेश के कैराना का रहने वाला है, आज हरियाणा पुलिस की कस्टडी में है। लेकिन जांच में सामने आए तथ्य दिखाते हैं कि यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि ISI के एक व्यापक डिजिटल जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश है।
-
डिजिटल ब्रेनवॉश का नया मॉड्यूल
नोमान की कहानी बताती है कि कैसे युवाओं को सोशल मीडिया और डिजिटल ऐप्स के माध्यम से टारगेट किया जा रहा है। 17 साल की उम्र में अवैध रूप से पाकिस्तान गया नोमान, वहां 15 दिन रहा। ISI कमांडर इकबाल काना और ऑपरेटिव दिलशाद मिर्जा ने उसे कोडवर्ड में बात करने, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और डिजिटल माध्यमों से प्रचार करने की ट्रेनिंग दी। नोमान को इस दौरान कई ऐप्स और टूल्स से भी परिचित कराया गया, जिनका इस्तेमाल गुप्त संदेश भेजने, वीडियो ट्रांसफर करने और ट्रैकिंग से बचने के लिए किया जाता था।
-
डिजिटल माध्यम से साझा की गयी भारत में सैन्य ठिकानों की जानकारी
पुलिस जांच में पता चला है कि नोमान इलाही ने गुरदासपुर, पठानकोट और अन्य संवेदनशील इलाकों की फोटो व वीडियो पाकिस्तान में बैठे ISI हैंडलर्स को भेजे। इन सभी जानकारियों का आदान-प्रदान डिजिटल नेटवर्किंग टूल्स के माध्यम से किया गया, जिसमें क्लाउड स्टोरेज, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और सोशल मीडिया चैट शामिल हैं।नोमान को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत श्रीनगर जाने का टास्क भी दिया गया था।
-
भारतीय बैंक खातों से फंडिंग, डिजिटल ट्रेल की जांच में जुटी एजेंसियां
जासूसी के बदले नोमान को भुगतान भी डिजिटल रूप से किया गया। बैंक ट्रांजैक्शन्स भारतीय खातों के माध्यम से किए गए, जिनमें से कई खाताधारक अब जांच के दायरे में हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इन खातों का संचालन अन्य सोए हुए एजेंट्स (sleeper cells) द्वारा हो रहा था? यह एंगल जांच एजेंसियों को भारत में मौजूद डिजिटल फाइनेंस नेटवर्किंग के जरिए चल रहे आतंकी फंडिंग मॉड्यूल की ओर इशारा कर रहा है।
नोमान का भाई जीशान पासपोर्ट से जुड़े काम करता था और अब लापता है। पिता अहसान का भी वही पेशा था। नोमान की गिरफ्तारी के बाद उसके घर से पासपोर्ट और संदिग्ध दस्तावेज मिले हैं। पुलिस इस पूरे परिवार की भूमिका और संभावित नेटवर्क पर गहराई से जांच कर रही है। नोमान की गिरफ्तारी के बाद कैथल से देवेंद्र सिंह, नूंह से अरमान और एक यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी हुई है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं ये सभी डिजिटल माध्यमों से आपस में जुड़े तो नहीं थे।
नोमान इलाही केस से साफ है कि पाकिस्तान की ISI अब पारंपरिक जासूसी से आगे बढ़कर डिजिटल नेटवर्किंग के जरिए भारत के युवाओं को ब्रेनवॉश कर आतंक की राह पर ले जाने की साजिश रच रही है। यह सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि देश की डिजिटल संप्रभुता का भी सवाल है।
ये भी पढ़ें: Patna में कारोबारी पर जानलेवा हमला, सड़क पर दौड़ाकर मारी गोली









