Ranchi/Mccluskieganj: राजधानी रांची से सटे शांत माने जाने वाले मैक्लुस्कीगंज में सोमवार की रात ऐसी चीखें दबी रह गईं, जिन्होंने अगर वक्त रहते किसी को जगा दिया होता, तो शायद एक पूरा परिवार उजड़ने से बच जाता। एक पिता ने अपनी ही पत्नी और दो मासूम बच्चों को मौत की नींद सुला दी। यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं है, यह एक पूरे परिवार के सपनों का अंत है। आरोपी रवि लोहरा ने सिलबट्टे से वार कर अपनी पत्नी रेणु देवी (32), सात साल के बेटे आरुष और चार साल की बेटी आरोही की नृशंस हत्या कर दी।
रात करीब 11:30 बजे रेणु देवी की मां मंजरी देवी और बहन काजल जब उसके घर पहुंचीं, तो दरवाजा खुला हुआ था। अंदर का मंजर ऐसा था कि कोई भी सामान्य इंसान कुछ पल के लिए सांस लेना भूल जाए। तीनों की लाशें खून से लथपथ पड़ी थीं। आरुष की वो साइकिल कोने में रखी थी, जिस पर वह स्कूल से लौटते वक्त सबसे पहले बैठता था। आरोही का गुलाबी रिबन फर्श पर पड़ा था, मानो पूछ रहा हो, “पापा ने ऐसा क्यों किया?”
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वो तो बच्चों को लेकर सैलून गया था…
मंजरी देवी की आंखों में आंसुओं के सैलाब के साथ उन्होंने बताया कि, “सोमवार की शाम सब कुछ सामान्य था। रवि ने बच्चों के बाल कटवाए, साथ में खाना खाया। कोई झगड़ा नहीं, कोई शोर नहीं। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि चंद घंटों में सब कुछ खत्म हो गया?”
पुलिस के मुताबिक, रवि पिछले डेढ़ महीने से मानसिक रूप से अस्वस्थ था और उसका इलाज चल रहा था। लेकिन क्या ये बीमारी इतनी गहरी थी कि वह अपने ही बच्चों के जीवन की परवाह भूल गया?
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एक पल में सब लुट गया…
रेणु देवी के पिता के बयान ने दिल को झकझोर दिया। उन्होंने कहा कि, “मेरी बेटी हमेशा हंसती रहती थी, बच्चों को पढ़ाती थी, सपना था कि आरुष डॉक्टर बने और आरोही टीचर। एक रात में सब कुछ खत्म हो गया।”
मैक्लुस्कीगंज पुलिस आरोपी की तलाश में है, पर जो खो गया है, वो वापस नहीं आएगा। यह मामला न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से नहीं लिया गया तो परिणाम भयावह भी हो सकते हैं।
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