Ranchi, 28 मई 2025 (बुधवार): झारखंड में पेसा कानून (PESA Act) के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा (BJP) नेता रघुवर दास (Raghubar Das) द्वारा हेमंत सरकार पर लगाए गए गंभीर आरोपों के जवाब में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने कड़ा पलटवार किया है।
झामुमो (JMM) के महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा कि भाजपा (BJP) और रघुवर दास (Raghubar Das) पेसा को लेकर आदिवासी समाज को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि “रघुवर दास यह बताएं कि उनके पूरे शासनकाल (2014–2019) में पेसा नियमावली क्यों नहीं बनी? क्या तब उन्हें आदिवासी समाज की चिंता नहीं थी?”
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भाजपा को आदिवासियों से नहीं, सत्ता से मतलब
श्री पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा को आदिवासी स्वशासन या पेसा की आत्मा से कोई सरोकार नहीं है, वे केवल इस मुद्दे को अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुरूप मोड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पेसा नियमावली के मसौदे को लेकर गंभीर प्रयास कर रही है। विधि विभाग से अनुमोदन प्राप्त हो चुका है और अब अंतिम स्तर पर प्रक्रिया चल रही है।
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धर्म के नाम पर समाज को बांटने की साजिश
झामुमो प्रवक्ता ने भाजपा पर धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी आदिवासी समाज को ‘विदेशी धर्म’ और ‘मूल धर्म’ के नाम पर बांटने की कोशिश कर रही है।
“यह वही भाजपा है जो ईसाई आदिवासियों को संदेह के घेरे में खड़ा करती रही है। अब पेसा को धर्म का चश्मा पहनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश हो रही है।”
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं सरना धर्म को मानने वाले आदिवासी हैं और सरकार आदिवासी हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा को यह तथ्य रास नहीं आ रहा, इसलिए वे भ्रम फैला रही है।
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झामुमो ने ही सरना कोड की आवाज संसद तक पहुंचाई
विनोद पांडेय ने भाजपा को याद दिलाया कि सरना कोड की मांग को लेकर सबसे पहले झारखंड विधानसभा में प्रस्ताव झामुमो सरकार ने ही पारित किया और केंद्र सरकार को भेजा, जो अब तक लंबित है।
“हमने आदिवासी समाज की अस्मिता, भाषा, संस्कृति और स्वशासन के लिए दशकों से संघर्ष किया है। झामुमो की भूमिका ऐतिहासिक रही है।”
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भाजपा आत्मचिंतन करे
प्रवक्ता ने भाजपा को आत्मचिंतन करने की सलाह देते हुए कहा कि पेसा, सरना कोड या अन्य जनजातीय अधिकारों पर बोलने से पहले उसे यह बताना चाहिए कि उसने सत्ता में रहते हुए क्या किया।
“आज जब हेमंत सरकार हर मोर्चे पर आदिवासी हितों को प्राथमिकता दे रही है, तो भाजपा को तकलीफ हो रही है। लेकिन आदिवासी समाज अब समझ चुका है कि कौन उनके साथ है और कौन केवल उनके नाम पर राजनीति करता है।”
रघुवर दास बताएं – उनके समय में क्यों नहीं बनी पेसा नियमावली ?
पेसा को लेकर आदिवासी समाज को गुमराह कर रही भाजपा।
◆ भाजपा और रघुवर दास आदिवासी समाज के मुद्दों को लेकर केवल राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं, न कि समाधान देना। रघुवर दास को पेसा कानून की याद अब आ रही है, जबकि उनके पूरे… pic.twitter.com/2asSelKKAo
— Vinod Kumar Pandey (@VinodPandeyJMM) May 28, 2025









