Sahibganj, 18 जून 2025 (बुधवार): बरहरवा प्रखंड के कुछ पंचायतों को काटकर एक नया प्रखंड कोटालपोखर बनाए जाने की दिशा में प्रशासनिक कवायद अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस सिलसिले में संबंधित पंचायतों में आगामी 19 जून को विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा, जो प्रखंड गठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उपायुक्त हेमंत सती के निर्देश पर यह पूरी प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ाई जा रही है। बरहरवा के प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, ग्राम सभाएं 19 जून को अपराह्न 3 बजे तक अगलाई, मधुवापाड़ा, श्रीकुंड, दरियापुर, विनोदपुर, पथरिया, मयूरकोला, कोटालपोखर, बड़ा सोनाकड़ और पलाशबोना पंचायतों में आयोजित होंगी। पंचायतों के मुखिया और सचिवों को इस दौरान अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर अनुमोदन की प्रति जिला कार्यालय को भेजना अनिवार्य होगा, ताकि समयबद्ध तरीके से नया प्रखंड अस्तित्व में आ सके।
दशकों पुरानी मांग अब हो रही पूरी
कोटालपोखर को प्रखंड बनाने की मांग क्षेत्रीय जनता पिछले कई दशकों से करती आ रही थी। भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र बड़ा है और लोगों को सरकारी कार्यों के लिए बरहरवा तक का लंबा रास्ता तय करना पड़ता था। स्थानीय लोगों का मानना है कि नया प्रखंड बनने से प्रशासनिक सुविधा पास में मिलेगी, योजनाओं का लाभ शीघ्र मिलेगा और ग्रामीणों की भागीदारी भी बढ़ेगी। ग्राम सभा की सूचना मिलते ही क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल है। पंचायत प्रतिनिधि भी इसे विकास की दिशा में अहम कदम बता रहे हैं।
बरहेट अनुमंडल गठन पर भी तेजी, हूल दिवस पर हो सकती है घोषणा
इधर, राज्य सरकार द्वारा बरहेट, बरहरवा और पतना प्रखंडों को मिलाकर ‘बरहेट अनुमंडल’ बनाए जाने की प्रक्रिया भी तेज़ कर दी गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सचिव पंकज मिश्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर उपायुक्त और अपर समाहर्ता ने अनुमंडल कार्यालय के लिए भूमि चिन्हित करने का आदेश बीडीओ को दिया है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 30 जून को साहिबगंज दौरे पर आ सकते हैं, जहां वे ‘बरहेट अनुमंडल’ की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। प्रस्तावित अनुमंडल कार्यालय भवन तीन एकड़ भूमि पर बनेगा, जिसकी संभावित जगह बरहेट बाजार या भोगनाडीह क्षेत्र हो सकती है।
करीब 3.9 लाख लोगों को मिलेगा लाभ
इस नए अनुमंडल से तीनों प्रखंडों की लगभग 3.9 लाख की आबादी को प्रशासनिक कार्यों के लिए अब जिला मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर योजनाओं की निगरानी, क्रियान्वयन और समाधान की प्रक्रिया तेज़ होगी। इससे शासन का विकेंद्रीकरण और जनसरोकारों में सुधार सुनिश्चित हो सकेगा।
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