Sahibganj में खनन पट्टों के बंटवारे में बड़ा खेल, कार्यालय ने नियमों का उल्लंघन कर जारी किये पट्टे, सीएजी रिपोर्ट ने खोली पोल

A major scandal erupted in Sahibganj's mining lease allocations; the office issued leases in violation of regulations, a CAG report exposed the scam.

Sahibganj: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की अनुपालन लेखापरीक्षा (राजस्व) रिपोर्ट ने साहिबगंज जिले में लघु खनिजों के पट्टों के आवंटन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और नियमों की अनदेखी का खुलासा किया है। 2017 से 2022 के बीच रांची और साहिबगंज जिलों में कुल 65 खनन पट्टे दिए गए थे, जिनमें से 65 मामलों की नमूना जांच की गई। इनमें से 24 मामलों, साहिबगंज के 12 और रांची के 12 में नियमों के उल्लंघन और अनियमितता पाई गई।

एक ही हलफनामा, कई नियमों की अनदेखी

रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड लघु खनिज समनुदेशन नियमावली (जीएमएमसी) 2004 के तहत आवेदकों से कई अलग-अलग हलफनामे और रॉयल्टी क्लियरेंस प्रमाणपत्र (रॉयल्टी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट) की मांग की जाती है। लेकिन साहिबगंज समेत सभी 24 मामलों में केवल एक ही हलफनामा लेकर प्रक्रिया पूरी कर दी गई। 17 मामलों में रॉयल्टी क्लियरेंस प्रमाणपत्र नहीं दिया गया। कई मामलों में हलफनामे अधूरे थे, जिनमें जरूरी प्रावधानों का जिक्र ही नहीं था। कुछ आवेदकों ने पिछली समय सीमा खत्म होने के बाद नए आवेदन जमा किए, पर उनमें भी आवश्यक दस्तावेज शामिल नहीं थे।

नियमों को ताक पर रखकर जारी हुए पट्टे

तीन मामलों (साहिबगंज में एक और रांची में दो) में आशय पत्र (लेटर ऑफ़ इंटेंट) समय सीमा के काफी बाद जारी किया गया। पाँच मामलों (साहिबगंज में तीन) में आवेदकों ने पर्यावरण मंजूरी (इसीसी) आशय पत्र जारी होने के 180 दिनों की तय सीमा के बाद प्रस्तुत की, फिर भी पट्टे दे दिए गए। सभी मामलों में बिना रॉयल्टी क्लियरेंस प्रमाणपत्र और अधूरे हलफनामों के आधार पर आवेदन स्वीकार कर पट्टे दे दिए गए।

ऑडिट ने पाया कि विभाग के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि खनन पट्टे केवल उन्हीं को दिए जाएं जो प्रक्रिया की निगरानी में न हों। गृह मंत्रालय की आचार संहिता का पालन हो। जेएमएमसी नियम 2004 का पूरी तरह अनुपालन हो।

खान एवं भूविज्ञान विभाग ने नहीं दिया जवाब

रिपोर्ट के अनुसार यह मामला नवंबर 2023 में खान एवं भूविज्ञान विभाग को भेजा गया और दिसंबर 2023 में अनुस्मारक भी भेजा गया, लेकिन मार्च 2024 तक कोई स्पष्ट जवाब विभाग की ओर से नहीं मिला। केवल संयुक्त सचिव ने खान निदेशक को पत्र भेजकर प्रतिक्रिया देने को कहा था।

साहिबगंज की स्थिति गंभीर

साहिबगंज में 12 मामलों की जांच से साफ हुआ कि खनन पट्टों के आवंटन में व्यवस्थित ढंग से नियमों की अनदेखी की गई। रॉयल्टी क्लियरेंस की जगह हलफनामों को मान लिया गया, अधूरे दस्तावेजों के बावजूद पट्टे जारी हुए और समय सीमा खत्म होने के बाद भी आवेदन स्वीकार किए गए। इनमें से सभी मामले वर्ष 2017 से 2022 के हैं।

साहिबगंज जिला खनन कार्यालय में खनन पट्टों के आवंटन की प्रक्रिया न केवल जेएमएमसी नियमावली 2004 का उल्लंघन थी बल्कि यह भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा मंत्रियों के लिए जारी आचार संहिता के मूल सिद्धांतों के भी विरुद्ध थी। सीएजी की यह रिपोर्ट झारखंड में खनन पट्टों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाती है और विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करती है।

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WASIM AKRAM
Author: WASIM AKRAM

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