Ranchi: झारखंड में खून का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लड रिप्लेसमेंट प्रणाली पर रोक लगाए जाने के बाद राज्य के कई ब्लड बैंकों में खून का स्टॉक तेजी से घटने लगा है। अब खून सिर्फ स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों के माध्यम से ही इकट्ठा किया जा सकेगा। वर्तमान में राज्य के 16 जिलों में कुल 3619 यूनिट खून बचा है, जबकि रोजाना औसतन 864 यूनिट की खपत होती है। ऐसे में यदि रक्तदान शिविर जल्द नहीं लगे, तो चार दिन के भीतर पूरा स्टॉक खत्म हो सकता है।
जामताड़ा की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां शनिवार तक एक भी यूनिट खून उपलब्ध नहीं था। वहीं चाईबासा में केवल सात यूनिट स्टॉक बचा है, जबकि यहां रोजाना 25 यूनिट की जरूरत होती है। खूंटी, चतरा और रामगढ़ जैसे जिलों में भी ब्लड बैंक लगभग खाली हो चुके हैं।
वर्तमान हालात में पूरा राज्य रांची, जमशेदपुर और धनबाद पर निर्भर हो गया है, जहां सबसे ज्यादा खून का स्टॉक मौजूद है। जमशेदपुर में शनिवार तक 1290 यूनिट, रांची में 839 यूनिट और धनबाद में 352 यूनिट खून उपलब्ध था। ये तीनों जिले राज्य के कुल स्टॉक का करीब 67 फीसदी हिस्सा अपने पास रखते हैं।
स्वैच्छिक ब्लड डोनर संगठन से जुड़े सदस्य डॉ. अभिषेक रंजन के अनुसार, अगर रिप्लेसमेंट सिस्टम पूरी तरह बंद रहा, तो अगले सप्ताह से कई ब्लड बैंक ‘नो स्टॉक’ की स्थिति में पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रतिदिन कम से कम 20 बड़े रक्तदान शिविर आयोजित किए जाने की आवश्यकता है, ताकि संकट को टाला जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां स्टॉक दो दिन से भी कम है, वहां आपातकालीन ऑपरेशन और प्रसव जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सकीय कार्य प्रभावित हो सकते हैं। जामताड़ा, चाईबासा, गिरिडीह और रामगढ़ जैसे जिलों में अगले 24 घंटे में ब्लड बैंक खाली हो सकते हैं, जिससे हालात और गंभीर हो जाएंगे।
इस संकट को देखते हुए कई सामाजिक संस्थाएं आगे आई हैं। आने वाले दिनों में राज्यभर में रक्तदान शिविरों की श्रृंखला शुरू होगी। रविवार को ऑल इंडिया सेबिल हुसैन ट्रस्ट धनबाद में, सैनी भक्त मंडली सरायकेला में, संत जेवियर स्कूल बोकारो में और विहंगम योग संगठन द्वारा बोकारो में शिविर लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा थर्मल बोकारो, रामगढ़ और चतरा में भी रविवार को रक्तदान शिविर होंगे, जबकि 3 और 4 नवंबर को पलामू और लोहरदगा में आयोजन प्रस्तावित हैं।
राज्य के लिए यह समय अत्यंत संवेदनशील है। अब रक्तदान शिविर ही झारखंड में जीवन रक्षक रक्त का एकमात्र स्रोत हैं। भास्कर की अपील है कि लोग आगे बढ़कर स्वेच्छा से रक्तदान करें, क्योंकि आपका एक यूनिट खून किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचा सकता है।
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