Ranchi: बिहार की डॉक्टर नुसरत परवीन से जुड़े हिजाब प्रकरण के बाद झारखंड की राजनीति में भूचाल आ गया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से हिजाब हटाने की घटना के बाद झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने डॉ. नुसरत को झारखंड में तीन लाख रुपये मासिक वेतन, मनपसंद पोस्टिंग, आवास और सुरक्षा के साथ सरकारी नौकरी देने का सार्वजनिक ऐलान कर दिया। इस घोषणा ने सत्तारूढ़ गठबंधन से लेकर विपक्ष तक नई बहस छेड़ दी है।
झारखंड में महागठबंधन की सरकार का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला
बिहार में महिला डॉक्टर डॉ. नुसरत प्रवीण के साथ हुई अमानवीय और शर्मनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया।
हिजाब खींचना सिर्फ एक महिला का नहीं, संविधान और इंसानियत का अपमान है।झारखंड के लोकप्रिय मुख्यमंत्री आदरणीय हेमंत सोरेन… pic.twitter.com/f2mPl3F0Im
— Dr. Irfan Ansari (@IrfanAnsariMLA) December 19, 2025
मंत्री के ऐलान के बाद जहां विपक्ष ने इसे नियम-कानून के खिलाफ बताया, वहीं सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी खुद को इस बयान से अलग कर लिया। पार्टी की ओर से कहा गया कि स्वास्थ्य मंत्री का बयान उनका निजी विचार है, इसे सरकार या पार्टी का आधिकारिक स्टैंड नहीं माना जाए। जेएमएम नेता मनोज पांडे ने कहा कि महिला डॉक्टर के साथ हुए व्यवहार पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन नौकरी देने की घोषणा सरकार की नीति से जुड़ा विषय है और इस पर मंत्री से ही सवाल किया जाना चाहिए।
वहीं भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा नेता भानु प्रताप शाही ने सीधा सवाल खड़ा करते हुए कहा कि किस नियोजन नीति के तहत सीधी नौकरी देने की घोषणा की गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मंत्री हैं तो क्या चमड़े का सिक्का चलाएंगे या फिर नियम-कायदे से सरकार चलाएंगे। शाही ने यह भी सवाल उठाया कि अगर बाहर की डॉक्टर को इस तरह सीधी नौकरी दी जाएगी तो झारखंड के बेरोजगार युवाओं और यहां की बेटियों का क्या होगा।
का जी इरफ़ान जी नुसरत को नौकरी सीधे किस नियोजन नीति के तहत देने की घोषणा किये जबाब दो ?
जिहादी मानसिकता से झारखंड नहीं चलेगा ..
@BJP4Jharkhand @IrfanAnsariMLA pic.twitter.com/jiLXjeh2ne
— Bhanu Pratap Shahi (@ShahiPratap) December 20, 2025
पूरा विवाद 15 दिसंबर को पटना में हुए एक कार्यक्रम से शुरू हुआ, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र सौंप रहे थे। इसी दौरान महिला डॉक्टर नुसरत परवीन के हिजाब को लेकर टिप्पणी और उसे हटाने की घटना सामने आई, जिस पर देशभर में आलोचना हुई। इस घटना को महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए डॉ. इरफान अंसारी ने झारखंड में नौकरी का ऑफर सार्वजनिक किया।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि किसी भी विभाग में इस तरह से सीधे तीन लाख रुपये वेतन वाली सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक राज्य के मेडिकल कॉलेजों में स्थायी प्रोफेसर स्तर पर भी अधिकतम वेतन इससे कम है। झारखंड में डॉक्टरों की नियुक्ति एक तय नीति और प्रक्रिया के तहत होती है, जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और स्वास्थ्य विभाग के फ्रेमवर्क के अनुसार बोली आधारित या पैकेज सिस्टम लागू है।
झारखंड सरकार के मॉडल के तहत डॉक्टरों को पोस्टिंग स्थान और विशेषज्ञता के आधार पर वेतन तय करने का विकल्प मिलता है। दूर-दराज और पिछड़े इलाकों में सेवा देने पर डॉक्टरों को अधिक पैकेज मिल सकता है, जो कुछ मामलों में तीन लाख तक पहुंचता है, लेकिन यह पूरी तरह सरकारी प्रक्रिया और शर्तों के अधीन होता है, किसी मंत्री के व्यक्तिगत ऐलान से नहीं।
ऐसे में डॉ. नुसरत को लेकर की गई घोषणा ने न केवल राजनीतिक बयानबाजी तेज कर दी है, बल्कि सरकार की नियुक्ति नीति और संवैधानिक प्रक्रिया पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।









