Sahibganj में डीएमएफटी फंड का दुरुपयोग? खनन प्रभावित इलाकों को नज़रअंदाज़ कर रही जिला प्रशासन?

Misuse of DMFT funds in Sahibganj? Is the district administration neglecting mining-affected areas?

Sahibganj: खनन प्रभावित जिलों में विकास कार्यों के लिए बनाए गए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड का उद्देश्य स्थानीय लोगों के जीवनस्तर को सुधारना और खनन से उत्पन्न समस्याओं को दूर करना है। लेकिन साहिबगंज जिले में इस फंड के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, वर्षों से खनन प्रभावित पंचायतों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, लेकिन साहिबगंज जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफटी फंड की राशि का उपयोग उन क्षेत्रों में किया जा रहा है जो प्रत्यक्ष रूप से खनन से प्रभावित नहीं हैं। जबकि केंद्र सरकार और झारखंड सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश स्पष्ट रूप से बताते हैं कि डीएमएफटी फंड का प्राथमिक उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, पर्यावरण सुरक्षा और जीविकोपार्जन के साधनों को विकसित करना है।

क्या है डीएमएफटी फंड और पीएमकेकेकेवाय योजना?

डीएमएफटी (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट) की स्थापना राज्य सरकारों द्वारा उन जिलों में की जाती है, जहां खनन गतिविधियाँ होती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य है, खनन से प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका के अवसर सुनिश्चित करना एवं यह पूरी व्यवस्था पीएमकेकेकेवाय (प्रधानमंत्री खानिज क्षेत्र कल्याण योजना) के तहत संचालित होती है।

पीएमकेकेकेवाय (PMKKKY) गाइडलाइंस (खंड 2) के अनुसार कम से कम 60% फंड प्राथमिक सेवाओं के लिए खनन प्रभावित क्षेत्रों में खर्च होना चाहिए। शेष 40% पूरक सुविधाओं पर, लेकिन वह भी इन्हीं क्षेत्रों में। पीएमकेकेकेवाय गाइडलाइन्स में स्पष्ट है कि, “सभी परियोजनाओं की योजना निर्माण ग्रामसभा की भागीदारी से होनी चाहिए। प्राथमिकता उन्हीं क्षेत्रों को मिलेगी जो खनन से प्रभावित हैं।” लेकिन बरहरवा प्रखंड में लागू योजनाएं इस नियम की धज्जियाँ उड़ाती हैं। पीएमकेकेकेवाय गाइडलाइन्स के पारा 2 में खनन प्रभावित इलाकों में प्राथमिक उद्देश्य के तहत पीने के पानी की आपूर्ति, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला और बाल कल्याण, पर्यावरण संरक्षण एवं जीविकोपार्जन के साधन मुहैया कराना अनिवार्य है। लेकिन ऐसा देखा जा रहा है कि ज्यादातर खनन प्रभावित पहाड़ों और क्षेत्रों में डीएमएफटी फंड से ये मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई हैं।

हालांकि, जमीनी हकीकत की बात करें तो साहिबगंज में इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा। जिला प्रशासन ने कई ऐसी योजनाएं चलाई हैं जो खनन प्रभावित इलाकों से दूर के गांवों और शहरों में हैं, जिससे मूल उद्देश्य ही खो गया है। इससे न केवल फंड का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि असल में प्रभावित समुदायों को उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा।

स्थानीय लोगों में असंतोष

खनन प्रभावित पंचायतों के ग्रामीणों ने इसको लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की है। एक स्थानीय लोगों का कहना है कि, “हमारे इलाके में खनन के कारण पानी की गम्भीत संकट उत्पन्न हो गयी है। लेकिन अभी तक डीएमएफटी फंड से कोई ठोस काम नहीं हुआ। वहीं दूसरी ओर, जिन जगहों पर खनन का नामोनिशान नहीं है वहां पक्की सड़कें, स्ट्रीट लाइट और सामुदायिक भवन बन रहे हैं। यह अन्याय है।”

पारदर्शिता पर खड़े हो रहे सवाल

डीएमएफटी फंड के खर्च की पारदर्शिता भी एक बड़ा सवाल है। साहिबगंज जिला प्रशासन की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट्स की अद्यतन जानकारी उपलब्ध नहीं है। वेबसाइट पर कुछ ही महीने पहले वित्तीय वर्ष 2023-24 का एनुअल रिपोर्ट ही अपडेट हुआ है, वहीं ऑडिट रिपोर्ट की अगर बात करें तो 2021-22 के बाद अभी तक ऑडिट रिपोर्ट जिला प्रशासन द्वारा वेबसाइट पर अपडेट नहीं किया गया है। पीएमकेकेकेवाय नीति के पारा 6 कहा गया है कि प्रत्येक योजना का वार्षिक सामाजिक ऑडिट होना चाहिए।

नहीं मिली प्रशासन की प्रतिक्रिया?

वहीं अब तक इस मुद्दे पर साहिबगंज जिला प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। यदि प्रशासन यह दावा करता है कि वह नियमों के अनुसार ही फंड का इस्तेमाल कर रहा है, तो जनता को परियोजनाओं की विस्तृत सूची, उनके स्थान और लाभार्थियों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। जानकारी सार्वजनिक होने पर खबर प्रमुखता से चलाई जाएगी।

पीएमकेकेकेवाय और डीएमएफटी फंड का उद्देश्य है खनन से त्रस्त समुदायों को राहत देना। साहिबगंज में इस नीति का दुरुपयोग उन लोगों के हक को छीन रहा है जिन्हें इस सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता है। लेकिन इस राशि का उपयोग नियमों के विरुद्ध अन्य क्षेत्रों में किया जा रहा है, तो यह एक गंभीर अनियमितता है। ज़रूरत है तत्काल ऑडिट, जवाबदेही और पारदर्शिता की, ताकि विकास की रोशनी सही जगहों तक पहुंच सके।

(ख़बर में उपयोग की गयी तस्वीर सांकेतिक है और AI द्वारा बनाई गयी है।)

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WASIM AKRAM
Author: WASIM AKRAM

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