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Barharwa के गैर-खनन प्रभावित क्षेत्रों में करोड़ों की योजनाएं स्वीकृत
Barharwa (Sahibganj)। खनन प्रभावित इलाकों के विकास के लिए बने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग को लेकर साहिबगंज जिले में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, साहिबगंज के कार्यालय की एक आधिकारिक चिट्ठी से यह तथ्य सामने आया है कि बरहरवा प्रखंड के ऐसे पंचायतों और गांवों में डीएमएफटी मद से योजनाएं स्वीकृत कर दी गईं, जिनका खनन गतिविधियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कोई लेना-देना नहीं है। यह स्थिति प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाय) और डीएमएफटी नीति के स्पष्ट उल्लंघन की ओर इशारा करती है।
दस्तावेज़ के अनुसार जिला ग्रामीण विकास अभिकरण द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए बरहरवा प्रखंड में छह विकास योजनाओं को डीएमएफटी फंड से मंजूरी दी गई है, जिन पर कुल मिलाकर 1.23 करोड़ रुपये से अधिक खर्च प्रस्तावित है। इनमें बरहरवा प्रखंड अंतर्गत अगलोई पंचायत के डोमपाड़ा में पीसीसी सह गार्डवॉल, बिशनपुर पंचायत के उ० प्रा० वि० हरिसपुर में चहारदिवारी, पथरिया पंचायत ने घाट मोहब्बतपुर में पीसीसी पथ, पलाशबोना पंचायत के जोड़ापोखर में पीसीसी पथ सह गार्डवॉल, बरहरवा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 2 में आरसीसी नाला एवं नगर पंचायत के वार्ड संख्या 3 में आरसीसी सह पीसीसी सड़क निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन स्थानों पर ये योजनाएं संचालित की जा रही हैं, उनमें से पांच योजना स्थल न तो खनन प्रभावित क्षेत्र घोषित हैं और न ही वहां किसी तरह का खनन प्रभाव मौजूद है। केवल पथरिया पंचायत का घाट मोहब्बतपुर गांव अप्रतक्ष्य रूप से खनन प्रभावित क्षेत्र है।

डीएमएफटी और पीएमकेकेकेवाय के दिशा-निर्देशों के अनुसार फंड का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा खनन प्रभावित क्षेत्रों की प्राथमिक आवश्यकताओं जैसे पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च किया जाना अनिवार्य है, जबकि शेष राशि भी उन्हीं क्षेत्रों में पूरक विकास कार्यों पर उपयोग होनी चाहिए। इसके साथ ही ग्राम सभा की सहभागिता से योजनाओं का चयन किया जाना आवश्यक बताया गया है। लेकिन बरहरवा प्रखंड में स्वीकृत योजनाएं इन सभी मानकों को दरकिनार करती नजर आ रही हैं। इस कथित अनियमितता के बीच साहिबगंज जिले के पत्थर खनन प्रभावित गांवों की स्थिति आज भी बदहाल बनी हुई है। वहां के ग्रामीण आज भी पीने के पानी, स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी सड़कों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन से उनकी जमीन और जीवन प्रभावित होता है, लेकिन विकास का लाभ कहीं और पहुंचाया जा रहा है।
ग्रामीण विकास विभाग की चिट्ठी में दर्ज योजनाओं की प्राक्कलन, तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति भी डीएमएफटी फंड से ही दी गई है, जिससे पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है। जानकारों बताते हैं कि डीएमएफटी फंड के उपयोग की स्वतंत्र ऑडिट और सार्वजनिक निगरानी नहीं हुई, तो खनन प्रभावित समुदायों के अधिकारों के साथ लगातार अन्याय होता रहेगा। यह मामला अब सिर्फ एक प्रखंड या जिले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि डीएमएफटी जैसे संवेदनशील फंड के दुरुपयोग को लेकर राज्य स्तर पर गंभीर समीक्षा की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
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