Sahibganj: जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) साहिबगंज के वित्तीय वर्ष 2021-22 की ऑडिट रिपोर्ट ने फंड के संचालन और खर्च को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा किए गए ऑडिट में जहां करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व नुकसान (रेवेन्यू लीकेज), लेखा प्रबंधन की खामियों और बकाया वसूली में चूक की बात सामने आई है, वहीं कई मामलों में विभागीय स्तर पर लापरवाही भी उजागर हुई है।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार आम चुनाव के दौरान राजमहल प्रखंड में पोलिंग स्टेशनों पर शौचालय की मरम्मत और नए निर्माण के लिए बीडीओ राजमहल को डीएमएफटी मद से 2.90 लाख रुपये सब-अलॉट किए गए थे। लेकिन निर्धारित कार्य के एवज में मात्र 1,44,346 रुपये ही खर्च किए गए, जबकि 1,45,654 रुपये बिना उपयोग के पड़े रहे। ऑडिटर ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट किया है कि पूरी सब-अलॉट की गई राशि संबंधित पीआईए से वसूली योग्य है, जो यह दर्शाता है कि न तो कार्य की समुचित मॉनिटरिंग हुई और न ही वित्तीय अनुशासन का पालन किया गया।
ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि डीएमएफटी के तहत बनी परिसंपत्तियों के लिए फिक्स्ड एसेट रजिस्टर का संधारण तक नहीं किया गया, जबकि करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित की गईं। इसके साथ ही किसी भी स्थायी संपत्ति पर मूल्यह्रास (डिप्रिसिएशन) का प्रावधान नहीं होने से वित्तीय स्थिति की वास्तविक तस्वीर धुंधली बनी हुई है। सबसे गंभीर मामला राजस्व रिसाव से जुड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रॉयल्टी के आधार पर मिलने वाली डीएमएफटी राशि की सटीक गणना के लिए जिला स्तर पर कोई प्रभावी तंत्र उपलब्ध नहीं कराया गया। लीज-वार रॉयल्टी और डीएमएफटी देयता का स्पष्ट विवरण न होने के कारण यह आशंका जताई गई है कि जिले को मिलने वाली वास्तविक राशि से कम फंड संग्रह किया गया, जिससे सरकारी राजस्व को बड़ा नुकसान हो सकता है।
ऑडिट में यह भी दर्ज है कि 18 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबे समय तक करंट अकाउंट में पड़ी रही, जिससे लगभग 48.60 लाख रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ। इसके अलावा 31 मार्च 2022 तक 5.42 करोड़ रुपये की डीएमएफटी राशि बकाया पाई गई, जबकि विभागीय रिकॉर्ड में इसे कहीं कम दर्शाया गया, जिसे ऑडिटर्स ने गंभीर चिंता का विषय बताया है।
सबसे चौंकाने वाला मामला डीएमएफटी फंड से पीआरईजेएचए (पैन आईआईटी अलुमनी रीच फॉर झारखंड) को वित्तीय वर्ष 2018-19 में दिए गए 3.50 करोड़ रुपये के ऋण का है, जो वर्षों बाद भी वापस नहीं हुआ। यह सवाल खड़ा करता है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण के लिए बने फंड को ऋण देने का आधार क्या था? ऑडिट रिपोर्ट के ये तथ्य स्पष्ट संकेत देते हैं कि डीएमएफटी साहिबगंज में न केवल फंड के उपयोग में असंतुलन है, बल्कि निगरानी और जवाबदेही की प्रणाली भी कमजोर बनी हुई है।
ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इन ऑडिट आपत्तियों पर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो खनन प्रभावित समुदायों के अधिकारों के साथ अन्याय की यह स्थिति लगातार बनी रहेगी। अब तक को केवल वित्तीय वर्ष 2021-22 का वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक किया गया है, उसके बाद के वित्तीय वर्षों का ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक होने से कई और तथ्य खुलकर सामने आ सकते हैं।









