Sahibganj: जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) साहिबगंज को लेकर उठ रहे सवाल अब केवल फंड के उपयोग तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि लेखापरीक्षा और वार्षिक प्रतिवेदन जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं पर भी गंभीर संदेह गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के परिशिष्ट-1 के खंड 6 और 7 में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद साहिबगंज में इन नियमों का पालन होता नहीं दिख रहा है।
पीएमकेकेकेवाय के खंड 6 के अनुसार जिला खनिज फाउंडेशन के लेखे की वार्षिक लेखापरीक्षा अनिवार्य रूप से कराई जानी चाहिए और उसे वार्षिक प्रतिवेदन के साथ सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं खंड 7 में यह भी स्पष्ट है कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के तीन माह के भीतर डीएमएफटी को अपनी गतिविधियों पर वार्षिक प्रतिवेदन तैयार कर फाउंडेशन के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद अनुमोदन की तिथि से एक माह के भीतर यह प्रतिवेदन सरकार को सौंपा जाएगा और फाउंडेशन की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा। इतना ही नहीं, हर फाउंडेशन का वार्षिक प्रतिवेदन राज्य विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाना भी अनिवार्य है।

लेकिन हकीकत इससे ठीक उलट नजर आती है। वर्तमान समय में वित्तीय वर्ष 2025-26 भी समाप्ति की ओर पहुंच चुका है, इसके बावजूद साहिबगंज जिला प्रशासन द्वारा अब तक केवल वित्तीय वर्ष 2021-22 की ही ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है। वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के ऑडिट रिपोर्ट का न तो कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध है और न ही उन्हें वेबसाइट पर डाला गया है। वहीं वित्तीय वर्ष 2023-24 का वार्षिक प्रतिवेदन (एनुअल रिपोर्ट) लगभग एक वर्ष बाद 2025-26 के वित्तीय वर्ष में वेबसाइट पर डालकर सार्वजनिक किया गया है।
इससे यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या इन वर्षों की लेखापरीक्षा कराई ही नहीं गई या फिर जानबूझकर उन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा रहा। डीएमएफटी जैसे संवेदनशील और खनन प्रभावित समुदायों से जुड़े फंड में नियमित ऑडिट और समयबद्ध वार्षिक प्रतिवेदन ही पारदर्शिता की सबसे बड़ी कसौटी होती है। यदि चार से अधिक वित्तीय वर्षों के ऑडिट और गतिविधि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई हैं, तो यह न सिर्फ पीएमकेकेकेवाय के प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि राज्य सरकार और विधानमंडल के प्रति जवाबदेही से भी सीधा बचाव माना जाएगा।
पहले से ही 2021-22 की ऑडिट रिपोर्ट में राजस्व रिसाव (रेवेन्यू लीकेज), करोड़ों रुपये के ब्याज नुकसान, बकाया वसूली में भारी अंतर और फंड प्रबंधन की गंभीर खामियां उजागर हो चुकी हैं। ऐसे में बाद के वर्षों की रिपोर्ट सामने न आना संदेह को और गहरा करता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि नियमों के अनुसार हर वर्ष ऑडिट और वार्षिक प्रतिवेदन तैयार होकर सरकार और विधानमंडल के समक्ष जाते, तो क्या डीएमएफटी फंड के कथित दुरुपयोग और मनमाने खर्च पर समय रहते रोक लग सकती थी।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि साहिबगंज डीएमएफटी के 2021-22 के बाद के सभी वित्तीय वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट और 2023-24 के बाद के वार्षिक प्रतिवेदन कब तक सार्वजनिक किए जाएंगे और कब तक राज्य विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा। पीएमकेकेकेवाय के खंड 6 और 7 के प्रावधानों का अब तक पालन क्यों नहीं किया गया? यदि इस स्तर की लापरवाही पर भी कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका सीधा नुकसान खनन प्रभावित समुदायों को ही उठाना पड़ेगा, जिनके कल्याण के लिए यह फंड बनाया गया था।
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