Bakudi Crusher Accident: क्रशर प्लांट (Crusher Plant) में काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा मानक (Safety Standards) बहुत जरूरी होते हैं, क्योंकि वहाँ भारी मशीनरी, धूल, शोर, और खतरनाक गतिविधियाँ होती हैं। झारखंड राज्य में पत्थर क्रशर प्लांटों में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा के लिए कई कानूनी और तकनीकी मानक निर्धारित किए गए हैं। ये मानक प्रदूषण नियंत्रण, कार्यस्थल सुरक्षा, श्रमिकों के स्वास्थ्य, और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित हैं।
तालझारी अंचल अंतर्गत बाकुडी में सुरक्षा मानकों को ताख पर रख कर एक क्रशर संचालित था। बीते शुक्रवार को राहुल मेटल्स कंपनी के क्रशर प्लांट के कन्वेयर बेल्ट में फंसकर बरहरवा निवासी मजदूर जीतन गुप्ता की दर्दनाक मौत मौके पर ही हो गयी थी। जिसके बाद मामले की लीपापोती करने के इरादे से अन्य कर्मी शव को मृतक के घर के पास रखकर रफूचक्कर हो गए। तीनपहाड़ थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम करवाया और यूडी केस दर्ज़ कर मामले की जाँच में जुट गयी। सभी चैनलों व अखबारों में ख़बरें प्रकाशित हुई। विभाग ना चाहते हुए भी शनिवार को हरकत में आया और कार्रवाई करने हेतु टीम घटनास्थल पहुंची। संवाददाताओं को टीम के पहुँचने की जानकारी नहीं मिली तो कार्रवाई क्या हुई यह साफ़ नहीं हो सका। एक स्थानीय संवाददाता ने जब दूरभाष से जिला खनन पदाधिकारी से बात की तो उन्होंने बताया कि कार्रवाई करने की तैयारी चल रही है।
The Factories Act, 1948 और The Mines Act, 1952 जैसे कानूनों में स्पष्ट प्रावधान हैं कि मालिक और प्रबंधक मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार हैं। यदि सुरक्षा प्रबंध नहीं किए जाते और दुर्घटना होती है, तो मालिक पर भारी जुर्माना और सज़ा हो सकती है। लाइसेंस रद्द करना या खदान/क्रशर को सील करना भी संभव है। मालिक/संचालक को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है, जिससे भविष्य में कोई भी खनन या क्रशर का लाइसेंस न मिल सके। लेकिन सवाल है खड़ा होता है कि यह कार्रवाई टिकाऊ होगी या काम चलाऊ? सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने के कारण किसी की जान जाने के मामले में क्रशर प्लांट संचालन की अनुमति रद्द कर दी जाएगी, जुर्माना लगाया जायेगा या दिखावा मात्र के लिए मालिक को कुछ दिन प्लांट बंद करने की कह दिया जाएगा।
- क्या कहते हैं राहुल मेटल्स क्रशर प्लांट के मालिक?
दुर्घटना के सम्बन्ध में जब राहुल मेटल्स के मालिक गोपी साधवानी से बात हुई तो उन्होंने बताया कि उनके द्वारा सभी मजदूरों और ऑपरेटरों को हेलमेट व जूते मुहैया करवाया जाता है। साथ ही सुरक्षा के दृष्टिकोण से एहतियाद बरता जाता है कि मजदूरों के साथ कोई अप्रिय घटना ना घाटे। कर्मियों का बीमा कराये जाने के सवाल पर उन्होंने बताया कि मृतक मजदुर कुछ माह पूर्व से ही काम कर रहा था जिस कारण उसका बिमा नहीं किया गया था।

- जिले में सुरक्षा नियमों की उड़ रही धज्जियाँ
मजदूरों की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए प्रमुख सुरक्षा मानक के मद्देनज़र कई तरह के व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण संचालक या मालिक द्वारा प्रदान करना अनिवार्य है। जिसमें सिर की सुरक्षा के लिए सुरक्षा हेलमेट, आँखों को धूल और कणों से बचाने के लिए सुरक्षा चश्मा, उच्च शोर स्तर से कान के पर्दों की रक्षा के लिए ध्वनि रोधी उपकरण, पैरों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा जूते, हाथों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा दस्ताने एवं धूल और हानिकारक कणों से फेफड़ों की सुरक्षा के लिए डस्ट मास्क या रेस्पिरेटर क्रशर प्लांट मालिक द्वारा उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इसके अलावे स्वास्थ्य बीमा और प्रत्येक छह महीने में श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच करनी चाहिए। लेकिन जिले में संचालित कई क्रशर प्लांटों में इन नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जाती है। बिना सुरक्षा उपकरणों के ही मजदूरों से काम लिया जाता है जिससे आये दिन छोटी-बड़ी दुर्घटना होती रहती है और सम्बंधित विभाग कुम्भकर्णी नींद से जागकर कार्रवाई ने नाम पर केवल खानापूर्ति करती है। मिली जानकारी के अनुसार आज तक किसी भी क्रशर प्लांट में सुरक्षा उपकरणों के आभाव से हुई मजदुर की मौत पर किसी भी मालिक या संचालक पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
- प्रशिक्षिेंत और प्रमाणित ऑपरेटरों द्वारा मशीनों का संचालन अनिवार्य
जानकारी के आभाव में क्रशर प्लांटों में कोई अप्रिय घटना ना घटे इसको लेकर केवल प्रशिक्षिेंत और प्रमाणित ऑपरेटरों द्वारा मशीनों का संचालन किया जाना चाहिए।मशीनों की नियमित जांच और मरम्मत सुनिश्चित करनी चाहिए एवं मशीनों पर स्पष्ट चेतावनी संकेत और सुरक्षा निर्देश होने चाहिए। लेकिन कम वेतन में काम करवाने के चक्कर में कई प्लांट मालिक अप्रशिक्षित ऑपरेटरों को काम पर रखते हैं जिससे आये दिन क्रशर प्लांटों में घटना दुर्घटना होती रहती है।
इन मानकों का पालन न करने पर क्रशर प्लांटों को संचालन की अनुमति रद्द की जा सकती है या पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जा सकती है। लेकिन इसके ठीक विपरीत कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति कर कुछ समय के लिए प्लांट को बंद कर दिया जाता है और फिर कुछ दिन बाद प्लांट पूर्व की तरह नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर चलने लगता है। सुरक्षा मानकों की निगेबान डीजीएमएस के अधिकारी भूले भटके जिले के दौरे पर आते हैं और चले जाते हैं। अगर विभाग सख्ती से सुरक्षा नियमों का अनुपालन करने पर जोर देती तो शायद आज कई लोगों की जान न गयी होती। अगर ऐसे ही नियमों की धज्जियाँ उड़ती रहीं तो सुरक्षा उपकरणों के आभाव में क्रशर प्लांटों में लोगों की बलि चढ़ती रहेगी।
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