New Delhi, 5 जून: संसद का मानसून सत्र इस वर्ष 21 जुलाई से 12 अगस्त तक आयोजित किया जाएगा। इसकी घोषणा केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने की। उन्होंने बताया कि इस सत्र के दौरान केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। इस बीच, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘पहलगाम आतंकी हमले’ को लेकर विपक्ष लगातार विशेष सत्र की मांग कर रहा था, लेकिन सरकार ने आम मानसून सत्र की तारीखों का ऐलान कर दिया है।
बीमा क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी
मानसून सत्र में पेश किए जाने वाले विधेयकों में बीमा संशोधन विधेयक सबसे प्रमुख माना जा रहा है। इस विधेयक में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को बढ़ाकर 100% करने का प्रस्ताव है। सूत्रों के अनुसार, इसका मसौदा तैयार है और जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद इसे वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा संसद में पेश किया जाएगा।
बजट सत्र की झलक
इससे पहले संसद का बजट सत्र दो चरणों में हुआ था:
- पहला चरण: 31 जनवरी से 13 फरवरी
- दूसरा चरण: 10 मार्च से 4 अप्रैल
राज्यसभा की कार्यवाही रही ऐतिहासिक
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के अनुसार, इस बार राज्यसभा की सबसे लंबी बैठक 3 अप्रैल को हुई, जो 17 घंटे से अधिक चली। इस दौरान कुल 159 घंटे की कार्यवाही दर्ज की गई, जिनमें 4 घंटे से अधिक आधी रात के बाद हुए। राज्यसभा में 49 निजी विधेयक पेश किए गए और उत्पादकता 119% रही।
लोकसभा की उत्पादकता भी सराहनीय
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि, “बजट सत्र के दौरान लोकसभा की 26 बैठकें हुईं, जिनमें 10 सरकारी विधेयक पेश किए गए और 16 विधेयक पारित हुए। इनमें वक्फ संशोधन विधेयक और मुस्लिम वक्फ (निरसन) विधेयक जैसे महत्वपूर्ण बिल शामिल थे। लोकसभा की उत्पादकता 118% रही।”
संभावित प्रमुख विधेयक (मानसून सत्र 2025):
- बीमा संशोधन विधेयक (FDI सीमा 100% करने का प्रस्ताव)
- डिजिटल डेटा संरक्षण विधेयक (संभावित)
- चुनाव सुधार संबंधी विधेयक (संभावित)
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