Ranchi: भाजपा (BJP) प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) द्वारा हूल दिवस के दिन भोगनाडीह (Bhognadih) में पुलिस कार्रवाई को लेकर झारखंड सरकार पर लगाए गए आरोपों का झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने कड़ा प्रतिवाद किया है। पार्टी के महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय (Vinod Kumar Pandey) ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि, “राज्य में कानून का शासन है और किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”
प्रशासन ने संयम और संवेदनशीलता से हालात को संभाला
श्री पांडेय ने कहा कि हूल दिवस के अवसर पर भोगनाडीह में श्रद्धा और गरिमा के साथ सरकारी कार्यक्रम आयोजित किया गया, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सुनियोजित रूप से माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। ऐसे में प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संयम और संवेदनशीलता का परिचय दिया। उन्होंने कहा, सरकार ऐसे तत्वों की पहचान कर रही है और उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी को अराजकता फैलाने की छूट नहीं दी जा सकती।
भाजपा फैला रही है भ्रम और उकसाव
विनोद पांडेय ने भाजपा पर झूठे और भ्रामक आरोपों से जनता को भड़काने का आरोप लगाते हुए कहा कि बाबूलाल मरांडी का बयान तथ्यहीन, गैर-जिम्मेदाराना और दुर्भावनापूर्ण है। उन्होंने कहा, हूल दिवस हमारी सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है, इसका राजनीतिक उपयोग करना बेहद शर्मनाक है। भाजपा को चाहिए कि वह गैर-जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका छोड़कर रचनात्मक और जनहित के मुद्दों पर बात करे।
हेमंत सरकार आदिवासी अस्मिता और अधिकारों के प्रति प्रतिबद्ध हैं
झामुमो प्रवक्ता ने यह स्पष्ट किया कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने हमेशा आदिवासियों के इतिहास, अस्मिता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। श्री पांडेय ने कहा, चंद लोगों की नादानी के कारण पूरे राज्य की शांति व्यवस्था को खतरे में नहीं डाला जा सकता। राज्य सरकार हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय
अपने वक्तव्य के अंत में झामुमो प्रवक्ता ने दो टूक कहा कि जो भी व्यक्ति या संगठन कानून को अपने हाथ में लेगा, उस पर नियमानुसार कार्रवाई होगी – चाहे वह किसी भी दल या विचारधारा से जुड़ा हो।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को भोगनाडीह में हूल दिवस के अवसर पर कार्यक्रम को लेकर उत्पन्न विवाद के बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। भीड़ द्वारा तीर चलाए जाने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया था, जिससे राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
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