-
तुरसाडीह गांव में 26 वर्षीय युवक की गला दबाकर हत्या, सदमे में परिवार
Hiranpur/Pakur: झारखंड के पाकुड़ जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। हिरणपुर थाना क्षेत्र के तुरसाडीह गांव में 26 वर्षीय युवक रूपेश यादव की गला दबाकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। रूपेश का शव गांव के ही हडमाडंगाल पोखर के पास झाड़ियों में पड़ा मिला, जिसे देख गांव में मातम पसर गया। इस दर्दनाक घटना ने न सिर्फ एक परिवार का चिराग बुझा दिया, बल्कि पूरे गांव को भी सकते में डाल दिया है।
भाई के घर से आया कॉल, फिर कभी नहीं लौटा रूपेश
रूपेश यादव ट्रैक्टर चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। वह मेहनती, सरल स्वभाव और खुशमिजाज युवक था। लेकिन 11 जुलाई की रात करीब दो बजे उसे किसी का कॉल आया, वही कॉल उसकी जिंदगी की आखिरी घंटी बन गई। रूपेश के साथी चालक दिगम्बर यादव बताते हैं, “रूपेश ने कहा कि भाभी गीता देवी का फोन आया है, मिलकर आता हूं। उसने ट्रैक्टर मेरे हवाले किया और चला गया। फिर कभी नहीं लौटा।”
सुबह उसका शव झाड़ियों में पड़ा मिला, गला दबाया गया था, शरीर पर संघर्ष के निशान थे। आंखें अब भी कुछ कहती हुई सी लगीं जैसे आखिरी वक्त तक उसने जीने की कोशिश की हो।
भाई पर ही हत्या का आरोप, परिवार का टूटा विश्वास
पुलिस ने शक के आधार पर महेश यादव और उसकी पत्नी गीता देवी को गिरफ्तार कर लिया है। यह वही गीता देवी हैं, जिनसे रूपेश के कथित संबंधों की चर्चा गांव में पहले भी होती रही थी। मृतक के पिता अर्जुन यादव की आंखें नम हैं, आवाज कांपती है, “मैंने अपने बेटे को मेहनत करते देखा था, गलती अगर थी भी, तो क्या उसकी सजा मौत थी?”
उन्होंने एफआईआर में छह लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसमें महेश यादव, गीता देवी, विष्णु यादव, रीता देवी, बिंदु यादव और कांति देवी शामिल हैं। उनका आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर साजिशन उनके बेटे की हत्या कर दी।
साबित हुआ संघर्ष, मिला हत्या का सबूत
पोस्टमार्टम में गले और हाथों पर नाखूनों के गहरे निशान मिले हैं, जैसे कि रूपेश ने अंतिम सांस तक खुद को बचाने की कोशिश की हो। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त गमछा और मृतक का मोबाइल भी बरामद कर लिया है। पुलिस निरीक्षक अनिल गुप्ता के नेतृत्व में जांच टीम ने कार्रवाई तेज कर दी है। थाना प्रभारी रंजन कुमार सिंह ने कहा, “मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है। हर पहलू को खंगाला जा रहा है।”
अब बस एक सवाल: क्या इंसाफ मिलेगा?
तुरसाडीह गांव में अब लोग फुसफुसा कर बात करते हैं, क्या किसी प्रेम की कीमत इतनी बड़ी हो सकती है कि एक जिंदगी ही खत्म कर दी जाए? रूपेश की मां बार-बार बेहोश हो जाती हैं, बहनें चुपचाप रोती रहती हैं। पिता अर्जुन यादव की आंखें अब भी दरवाजे पर टिकी हैं, शायद रूपेश लौट आए… लेकिन वह अब कभी नहीं लौटेगा।
ये भी पढ़ें: मोबाइल चोरों की गिरफ्तारी को लेकर Tinpahar में जीआरपी की छापेमारी, खाली हाथ लौटी पुलिस









