Barhet (Sahibganj): जिला उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी हेमंत सती ने शनिवार को बरहेट प्रखंड स्थित दो शैक्षणिक संस्थानों प्राथमिक विद्यालय बांसजोरी और उत्क्रमित उच्च विद्यालय पहाड़पुर का औचक निरीक्षण किया। यह दौरा जिला प्रशासन की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता के तहत किया गया।
बांसजोरी विद्यालय में मिली सकारात्मकता, शिक्षक होंगे सम्मानित
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त प्राथमिक विद्यालय बांसजोरी की शैक्षणिक व्यवस्था और शिक्षण गुणवत्ता से संतुष्ट नजर आए। उन्होंने बच्चों से विभिन्न विषयों में सवाल पूछे और उनकी समझ व उत्तरों से प्रभावित होकर विद्यालय के शिक्षक श्री प्रलाद दास के प्रयासों की खुलकर सराहना की। उपायुक्त ने घोषणा की कि श्री दास को अगली जिला स्तरीय शिक्षा बैठक में सम्मानित किया जाएगा।
श्री सती ने विद्यालय की साफ-सफाई, कक्षा कक्ष की व्यवस्था, पाठ्य सामग्री और प्रेरणादायक वातावरण पर विशेष ध्यान देते हुए निर्देश दिया कि कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग दिया जाए।
आज बरहेट प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय बांसजोरी एवं उत्क्रमित उच्च विद्यालय पहाड़पुर का औचक निरीक्षण किया।
बांसजोरी विद्यालय में बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता देखकर प्रसन्नता हुई। #EducationMatters @JharkhandCMO @HemantSorenJMM pic.twitter.com/H71Y8O2JG8— DC Sahibganj (@dc_sahibganj) July 26, 2025
पहाड़पुर उच्च विद्यालय में लापरवाही पर जताई नाराजगी
दूसरी ओर, उत्क्रमित उच्च विद्यालय पहाड़पुर में निरीक्षण के दौरान शैक्षणिक गतिविधियों में गंभीरता की कमी और छात्रों के शैक्षणिक स्तर में गिरावट देखी गई। उपायुक्त ने इस पर स्पष्ट असंतोष जताते हुए संबंधित शिक्षकों को फटकार लगाई और कहा कि गुणवत्ता में सुधार के लिए ठोस कार्रवाई की जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि कक्षाओं को नियमित किया जाए, पढ़ाई की निगरानी की जाए और छात्रों के प्रदर्शन में सुधार लाने हेतु विशेष प्रयास किए जाएं। श्री सती ने दोहराया कि, “शिक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है, और इस क्षेत्र में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।”
शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता की दिशा में गंभीर प्रयास
निरीक्षण के बाद उपायुक्त ने कहा कि सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है। औचक निरीक्षणों का उद्देश्य सिर्फ निगरानी नहीं, बल्कि प्रेरणा देना भी है ताकि शिक्षक और विद्यार्थी दोनों शिक्षा के प्रति गंभीर रहें।
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