Ranchi: रामदास सोरेन के निधन पर झारखंड शोकाकुल, नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

Ranchi: Jharkhand mourns the death of Ramdas Soren, leaders pay emotional tribute

Ranchi, 16 अगस्त: झारखंड के शिक्षा मंत्री और झामुमो के वरिष्ठ नेता रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से पूरा राज्य शोक में डूब गया है। मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल और विपक्षी दलों के नेताओं तक ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और इसे झारखंड की राजनीति एवं समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर भावुक शब्दों में लिखा, “ऐसे छोड़ कर नहीं जाना था रामदास दा… अंतिम जोहार दादा…”

राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा, “यह राज्य के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मैं शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करता हूं।”

पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने प्रार्थना करते हुए कहा, “मरांग बुरु दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें। अंतिम जोहार!”

वहीं, विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने इसे सामाजिक और राजनीतिक क्षति बताते हुए कहा, “ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और परिजनों को संबल प्रदान करें।”

आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा, “रामदास सोरेन जी का असमय देहावसान अत्यंत पीड़ादायक है। ॐ शांति॥”

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा, “बाबा बैद्यनाथ से प्रार्थना है कि वे रामदास सोरेन की आत्मा को शांति दें और परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें।”

मंत्री दीपिका पांडेय ने कहा, “रामदास सोरेन जी का योगदान और जनसेवा सदैव याद किया जाएगा।”

मंत्री दीपक बिरुआ ने भावुक होते हुए लिखा, “बस इतना याद रहेगा जीवनभर ‘एक साथी और भी था’। अंतिम जोहार मेरे भाई।”

वहीं मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा, “रामदास दा के रूप में मैंने अपना अभिभावक खो दिया है। उनका जाना झामुमो और पूरे झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है।”

एक महीने में दूसरा बड़ा झटका

रामदास सोरेन का निधन ऐसे समय हुआ है जब झारखंड अभी भी दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के दुख से उबर नहीं पाया है। 4 अगस्त को शिबू सोरेन के निधन के बाद अब महज एक महीने के भीतर राज्य ने दो बड़े आदिवासी नेताओं को खो दिया है। संयोग से आज ही गुरुजी का श्राद्धकर्म भी है।

तीन बार विधायक बने थे

रामदास सोरेन कोल्हान क्षेत्र के लोकप्रिय नेता थे। उन्होंने घाटशिला विधानसभा से 2009, 2019 और 2024 में जीत दर्ज की थी। 2009 में उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉ. प्रदीप बालमुचू को हराकर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई थी। उनका सरल स्वभाव, जनसेवा के प्रति निष्ठा और राजनीतिक प्रतिबद्धता हमेशा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

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Author: WM 24x7 News

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