Ranchi: दो साल में 89 नकली दवाएं पकड़ी गईं, केवल दवा बैन लेकिन एजेंसी पर कार्रवाई नहीं

Ranchi: 89 fake medicines seized in two years, only the medicine was banned but the agency took no action against anyone.
  • राज्य में सब-स्टैंडर्ड मेडिसिन का बड़ा खेल, सप्लाई सरकारी अस्पतालों तक

Ranchi: झारखंड में नकली और घटिया क्वालिटी की दवाओं का कारोबार खुलकर चल रहा है। दुकानों से लेकर सरकारी अस्पतालों तक सप्लाई की जा रही इन दवाओं से मरीजों की तबीयत बिगड़ रही है। कई मामलों में मरीज अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने साफ कहा, “दवा के साइड इफेक्ट से हालत खराब हुई।”

राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय के ताजा आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। पिछले दो साल में 89 दवाएं नकली या घटिया क्वालिटी की पाई गईं। लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि विभाग ने न तो किसी एजेंसी पर सख्त कार्रवाई की और न ही कोई एफआईआर। केवल इन दवाओं की बिक्री और खरीद पर रोक लगाकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

700 में से 54 दवाएं 2024 में फेल, 2025 में भी 36 घटिया निकलीं

2024 में राज्य के विभिन्न जिलों से 700 दवाओं के सैंपल लिए गए थे। इनमें से 54 दवाएं घटिया क्वालिटी की पाई गईं। 2025 में अब तक 520 सैंपलों की जांच हुई है, जिनमें से 36 फेल हो चुकी हैं। अभी कई सैंपलों की रिपोर्ट आना बाकी है, यानी यह संख्या और भी बढ़ सकती है।

पलामू में 18 दवाएं निकलीं नकली, विटामिन और कैल्शियम की मात्रा 5% भी नहीं

पलामू में तो स्थिति और गंभीर है। एक साल पहले टेंडर के जरिए जमशेदपुर की एक कंपनी ने विटामिन और कैल्शियम की दवा सप्लाई की थी। ड्रग डिपार्टमेंट की जांच में खुलासा हुआ कि इन दवाओं में जरूरी तत्व 5% भी नहीं थे। जांच के लिए 88 सैंपल भेजे गए थे, 32 की रिपोर्ट आई और इनमें से 18 घटिया निकलीं। इसका सीधा मतलब सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बीमार करने वाली दवाएं दी जा रही थीं।

ड्रग लैब का वादा अधूरा, 5 महीने में कुछ नहीं बदला

राज्य सरकार ने दुमका, जमशेदपुर और पलामू में ड्रग टेस्टिंग लैब खोलने का ऐलान किया था। रांची की मौजूदा लैब को अत्याधुनिक बनाने की भी बात हुई थी। साथ ही खाद्य जांच प्रयोगशालाएं खोलने का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन पांच महीने बाद न तो किसी जिले में लैब बनी और न ही अभियान चला। वादे कागजों में सिमटकर रह गए हैं।

QR कोड से रोकना था फर्जीवाड़ा, सिस्टम अबतक लागू नहीं

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने पांच महीने पहले घोषणा की थी कि बिना क्यूआर कोड वाली दवाएं राज्य में नहीं बिकेंगी। क्यूआर कोड से दवा की मैन्युफैक्चरिंग, बैच नंबर और लाइसेंस जैसी जानकारी मिलती, जिससे नकली दवा की पहचान आसान होती। लेकिन यह सिस्टम अबतक जमीन पर लागू नहीं हुआ है।

रांची से भेजे गए इन दवाओं के सैंपल जांच में फेल
दवा का नाम बैच नंबर क्वालिटी
HMT मल्टीविटामिन BU 1722 घटिया
मेडमॉक्सील 125 XMSD 001 घटिया
प्रीसेफ 200 एमबी BHCJ 009 घटिया
साइक्लो पार टैबलेट CYF 22004 घटिया
वोमिसेव 10 CHT 22321 घटिया
नियूजोल 400 NZL 22025 घटिया

इन दवाओं के सैंपल सदर अस्पताल रांची और एक अर्बन हेल्थ सेंटर से लिए गए थे।

कार्रवाई नदारद, सिस्टम पर उठ रहे सवाल

दवा कंपनियों और सप्लायर एजेंसियों पर कार्रवाई न होने से सवाल उठ रहे हैं। आखिर राज्य में नकली दवा के बड़े नेटवर्क को कौन बचा रहा है? जब दवा घटिया पाई गई तो निर्माता और सप्लायर पर केस क्यों नहीं हुआ? अगर यही हाल रहा तो स्वास्थ्य व्यवस्था में फर्जीवाड़े का यह खेल और बड़ा हो सकता है।

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WASIM AKRAM
Author: WASIM AKRAM

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