Pakur में तीन मंजिला निजी अस्पताल बिना फायर NOC और CTO के धड़ल्ले से संचालित, सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था

A three-story private hospital in Pakur is operating without a fire NOC or CTO, raising questions about its healthcare system.
  • सरकारी डॉक्टर साहिबगंज में पदस्थापित, लेकिन पाकुड़ में चला रहे निजी नर्सिंग होम

Pakur: शहर के दिलावर कॉलोनी स्थित राहत नर्सिंग होम में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 19 वर्षीय गर्भवती महिला साइना परवीन की मौत ने जिले में प्राइवेट नर्सिंग होम के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और संचालक डॉ. सोहैल अनवर पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आक्रोशित लोगों को शांत कराया गया।

परिजनों का कहना है कि पाकुड़ सदर प्रखंड के देवतल्ला लड्डूपाड़ा की रहने वाली साइना परवीन भर्ती के समय पूरी तरह स्वस्थ थी, लेकिन ऑपरेशन के कुछ ही घंटे बाद उसकी मौत हो गई। परिवार ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।

बिना फायर NOC और प्रदूषण बोर्ड की अनुमति के चल रहा अस्पताल

मिली जानकारी के अनुसार राहत नर्सिंग होम के पास न तो फायर सेफ्टी NOC, न झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से Consent to Operate (CTO) और न ही बायो मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल लाइसेंस है। इसके बावजूद नर्सिंग होम पिछले कई वर्षों से तीन मंजिला इमारत में बिना किसी रोक-टोक के संचालित हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक पाकुड़ जिले में संचालित अधिकांश निजी नर्सिंग होम इसी तरह बिना वैध कागजात, NOC और लाइसेंस के चल रहे हैं। लेकिन जिला स्वास्थ्य विभाग ने अब तक किसी भी संस्थान पर ठोस कार्रवाई नहीं की है।

सरकारी डॉक्टर साहिबगंज में पदस्थापित, निजी अस्पताल पाकुड़ में

राहत नर्सिंग होम के संचालक डॉ. सोहैल अनवर वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरहरवा, जिला साहिबगंज में बतौर सरकारी चिकित्सक कार्यरत हैं। स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार “जिन चिकित्सकों को गैर-अभ्यास भत्ता (Non-Practicing Allowance) नहीं मिलता, वे अपना निजी क्लिनिक केवल उसी जिले में चला सकते हैं, जहां वे पदस्थापित हैं।” लेकिन डॉक्टर सोहैल अनवर ने नियमों को दरकिनार करते हुए साहिबगंज में पदस्थापित रहते पाकुड़ में निजी नर्सिंग होम खोल रखा है, जो स्पष्ट रूप से सरकारी सेवा आचार संहिता और स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार गंभीर उल्लंघन है।

स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल

जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से नर्सिंग होम की जांच और निगरानी के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है। राहत नर्सिंग होम के संचालन पर भी न तो कभी निरीक्षण किया होगा और न ही दस्तावेजों की जांच। अगर जाँच की गयी होती ऐसे नर्सिंग होम संचालित ही नहीं होते। ऐसे में सवाल उठता है कि जब लाइसेंस और फायर NOC के बिना अस्पताल चलाना कानूनन अपराध है तो जिला स्वास्थ्य विभाग चुप क्यों है? जब बिना लाइसेंस अस्पतालों में इलाज के नाम पर लोगों की जान जा रही है, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

क्या कहते हैं पाकुड़ जिले के सिविल सर्जन?

पाकुड़ सिविल सर्जन डॉक्टर सुरेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि जाँच टीम गठित कर पुरे मामले की जाँच की जाएगी। अगर लापरवाही उजागर हुई या अस्पताल बिना वैध कागजात के संचालित पाया गया तो नियमसंगत कार्रवाई की जाएगी।

मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन और संचालक से संपर्क साधने का प्रयास किया गया लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई। WM 24X7 News अस्पताल प्रबंधन एवं संचालक के प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में है। जैसे ही उनकी प्रतिक्रिया आएगी, उनके वक्तव्य को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जायेगा। 

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WASIM AKRAM
Author: WASIM AKRAM

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