Ranchi: अवैध कोयला कारोबार को लेकर राज्य में ईडी की बड़ी कार्रवाई और उसके बाद बढ़ती राजनीतिक गर्मी के बीच विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी खुद सवालों में घिरते नजर आ रहे हैं। हेमंत सरकार पर लगातार प्रहार करने वाले मरांडी ने ईडी की छापेमारी को लेकर सरकार, धनबाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए, लेकिन अब उन्हीं की तस्वीरें उस कोयला कारोबारी एलबी सिंह के साथ वायरल हो रही हैं (वायरल फोटो की पुष्टि www.wm24x7.in नहीं करता), जिनके ठिकानों पर ईडी ने हाल ही में छापा मारा है।

वायरल तस्वीरों में एलबी सिंह बाबूलाल मरांडी को गुलदस्ता भेंट करते और दोनों को साथ बैठकर बातचीत करते देखा जा सकता है। यह तस्वीरें पहले भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में सामने आ चुकी हैं, पर ईडी की कार्रवाई के बाद इनके वायरल होने से राजनीतिक हलकों में नए सवाल उठ खड़े हुए हैं। मरांडी जिस अवैध कोयला नेटवर्क को लेकर सरकार पर हमलावर हैं, उसी नेटवर्क से जुड़े एक कारोबारी के साथ उनके संबंधों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मरांडी ने अपने हालिया वीडियो बयान में एसपी, इंस्पेक्टर से लेकर सरकारी तंत्र पर तो कई गंभीर आरोप लगाए, पर धनबाद के भाजपा सांसद, झरिया और बाघमारा के भाजपा विधायकों, जो क्षेत्र में कोयला कारोबार पर सबसे अधिक प्रभाव रखते हैं, का नाम नहीं लिया। एलबी सिंह भी भाजपा से जुड़े रहे हैं और पिछले चुनाव में टिकट के प्रबल दावेदार थे। ऐसे में विपक्षी नेता की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

धनबाद, झरिया और बाघमारा में अवैध खनन कोई नया मुद्दा नहीं है। शिकायतें लगातार आती रही हैं कि क्षेत्र में प्रभावशाली राजनीतिक गुटों की छत्रछाया में अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। यहां तक कि कुछ महीने पहले गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी और पूर्व मंत्री सरयू राय को बाघमारा में प्रवेश नहीं करने दिया गया था। इस घटना के बाद भी बाबूलाल मरांडी ने स्थानीय भाजपा नेताओं पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की।
अब जब ईडी ने जिस कारोबारी पर शिकंजा कसा है, उसका फोटो विपक्ष के नेता के साथ वायरल है, तो सवाल और गहरा गया है, क्या बाबूलाल मरांडी अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ कार्रवाई की मांग केवल सरकार तक सीमित रखेंगे, या अपनी पार्टी के प्रभावशाली चेहरों और स्थानीय नेटवर्कों के खिलाफ भी खुलकर बोलेंगे? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर मरांडी सड़क पर उतरकर अवैध खनन रोकने की पहल नहीं करते, तो उनकी मुहिम पर सवाल खड़े होंगे और उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता भी कटघरे में आ सकती है।
[Disclaimer: वायरल फोटो की पुष्टि www.wm24x7.in नहीं करता]
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