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पीएमकेकेवाय के निर्देशों को दरकिनार कर जिला प्रशासन ने बदली प्राथमिकताएँ, खनन प्रभावित इलाकों की ज़रूरतें फिर हाशिये पर
Sahibganj: प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेवाय) के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद साहिबगंज जिले में डीएमएफटी फंड के उपयोग का तरीका सवालों के घेरे में आ गया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि जहां खनन प्रभावित इलाकों के लिए चिन्हित उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में फंड खर्च करने की अनिवार्यता थी, वहीं जिला प्रशासन ने इन क्षेत्रों को लगभग नजरअंदाज कर अन्य प्राथमिकता और फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अधिक जोर दिया।
वित्तीय वर्ष 2022-23 में डीएमएफटी फंड से उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र के अंतर्गत कुल 470 योजनाओं के लिए 3871.899 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई, लेकिन वास्तविक खर्च महज 428.591 लाख रुपये तक ही सिमट कर रह गया। यानी स्वीकृत राशि का केवल 11.07 प्रतिशत ही जमीन पर उतर पाया। ड्रिंकिंग वाटर जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में 336 योजनाओं के लिए 1886.211 लाख रुपये स्वीकृत किए गए, लेकिन इनमें से सिर्फ 74.302 लाख रुपये ही खर्च किए गए। यह आंकड़ा उस जिले के लिए बेहद चिंताजनक है जहां खनन प्रभावित इलाकों में आज भी स्वच्छ पेयजल एक बड़ी समस्या बना हुआ है।
पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर चयनित 17 योजनाओं के लिए 423.750 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि एक भी रुपये का खर्च नहीं किया गया। दशकों से हो रहे ताबड़तोड़ खनन के कारण प्रदूषण से जूझ रहे इलाकों में सांस लेना तक मुश्किल हो गया है, लेकिन जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में पर्यावरण संरक्षण कहीं नजर नहीं आया।

यही वजह रही कि इस मद की कोई भी योजना वित्तीय वर्ष 2022-23 में पूरी नहीं की गई। स्वास्थ्य देखभाल की 8 योजनाओं के लिए 518.200 लाख रुपये स्वीकृत हुए, जिनमें से 243.875 लाख रुपये ही खर्च किए गए। महिला एवं बाल कल्याण एवं विकास के लिए सिर्फ एक योजना स्वीकृत की गई, जिसकी लागत 39.366 लाख रुपये थी, लेकिन इस योजना पर भी एक रुपया तक खर्च नहीं किया गया। शिक्षा क्षेत्र में 49 योजनाओं के लिए 827.892 लाख रुपये की स्वीकृति के मुकाबले महज 71.013 लाख रुपये का ही उपयोग हुआ, जो जिले में खनन प्रभावित बच्चों और युवाओं के भविष्य को लेकर प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है।
इसके उलट, अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र और फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर में जिला प्रशासन ने कहीं अधिक सक्रियता दिखाई। इस मद में 53 योजनाओं के लिए 1215.483 लाख रुपये स्वीकृत किए गए, जिनमें से 644.365 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। यानी लगभग 54 प्रतिशत से अधिक राशि का उपयोग कर लिया गया। यह स्थिति पीएमकेकेवाय और डीएमएफटी के निर्देशों के ठीक विपरीत है।
इन आंकड़ों से साफ हो जाता है कि साहिबगंज जिले में डीएमएफटी फंड के उपयोग को लेकर प्रशासन की अपनी ही अलग नीति काम कर रही है, जो केंद्र सरकार द्वारा जारी पीएमकेकेवाय के निर्देशों के ठीक विपरीत है। सवाल यह भी उठता है कि जब खनन प्रभावित इलाकों में पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला-बाल कल्याण जैसी बुनियादी जरूरतें आज भी अधूरी हैं, तो फिर प्रशासन अन्य प्राथमिकता वाले निर्माण कार्यों पर इतना अधिक जोर क्यों दे रहा है।
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