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Sahibganj नगर परिषद से राजमहल तक रणनीति, संगठन और नेतृत्व की जीत
Sahibganj Municipal Election: साहिबगंज की शहरी राजनीति में जो असंभव माना जा रहा था, वह संभव होकर दिखा और इस सियासी उलटफेर के केंद्र में रहे पंकज मिश्रा। संथाल परगना के चाणक्य कहे जाने वाले झामुमो केंद्रीय सचिव सह प्रवक्ता पंकज मिश्रा की सधी हुई रणनीति ने भाजपा के परंपरागत गढ़ साहिबगंज नगर परिषद को उसके कब्जे से मुक्त करा दिया। अध्यक्ष पद पर झामुमो समर्थित प्रत्याशी रामनाथ पासवान उर्फ छोटू पासवान की जीत ने शहरी वोटरों की राजनीति पर चली आ रही धारणाओं को भी चुनौती दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों की आम राय थी कि शहरी इलाकों में भाजपा का दबदबा तोड़ना आसान नहीं। लेकिन पंकज मिश्रा ने चुनाव को आरोप-प्रत्यारोप की धुरी से हटाकर शहर के विकास के एजेंडे पर खड़ा किया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया: यह चुनाव व्यक्ति नहीं, साहिबगंज के भविष्य का है। इसी सोच के साथ उन्होंने व्यापारिक वर्ग, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेतृत्व के साथ बैठकों का सिलसिला शुरू किया। अमख पंचायत में व्यवसायियों से संवाद कर नगर निकाय में डबल इंजन के विकास रोडमैप को सामने रखा और समर्थन हासिल किया।
जैसे-जैसे मतदान नजदीक आया, पंकज मिश्रा की रणनीति ने रंग दिखाना शुरू किया। जिन वार्डों में कभी झामुमो की मौजूदगी नाममात्र थी, वहां भी संगठन सक्रिय हुआ और मुकाबला मजबूत बना। खुद मैदान में उतरकर रोड शो, घर-घर संपर्क और मुद्दों की साफ प्रस्तुति इन सबने शहरी मतदाताओं का भरोसा जीता।

रणनीतिक मोर्चे पर भी उन्होंने मास्टर स्ट्रोक खेला। भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष मनोज पासवान और भाजपा के पूर्व जिला महासचिव व नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष श्रीनिवास यादव का झामुमो में आना चुनावी हवा को निर्णायक मोड़ दे गया। सहयोगी दलों के स्थानीय कुनबों को एकजुट रखने और विरोधी मतों के ध्रुवीकरण को रोकने की सुनियोजित योजना ने परिणाम की दिशा तय कर दी।
इस जीत की गूंज राजमहल तक सुनाई दी। वहां झामुमो समर्थित प्रत्याशी किताबुद्दीन शेख की विजय को भी संगठनात्मक कौशल और रणनीतिक नेतृत्व के कारण पंकज मिश्रा के खाते में दर्ज किया जा रहा है। एक साथ दो शहरी मोर्चों पर मिली सफलता ने यह साफ कर दिया कि यह जीत संयोग नहीं, सुसंगठित नेतृत्व की परिणति है।
मतगणना के बाद जीत का प्रमाण पत्र प्राप्त करते ही रामनाथ पासवान सीधे पंकज मिश्रा के आवास पहुंचे और आशीर्वाद लिया, मानो यह संदेश हो कि यह सफलता एक व्यक्ति की नहीं, एक नेतृत्व की है।
साहिबगंज की राजनीति में यह अध्याय बताता है कि जब रणनीति स्पष्ट हो, संगठन सक्रिय हो और एजेंडा विकास का हो तो सबसे मजबूत किले भी ढहाए जा सकते हैं।
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