Sahibganj: साहिबगंज की राजनीति ने अब साफ संकेत दे दिया है कि शहरी क्षेत्र में भाजपा की जड़ें लगभग उखड़ चुकी हैं। राजमहल लोकसभा, विधानसभा और अब साहिबगंज नगर परिषद व राजमहल नगर पंचायत में झामुमो का परचम लहरा रहा है। राजनीतिक जानकार इस बड़े बदलाव के केंद्र में एक ही नाम को निर्णायक मान रहे हैं, पंकज मिश्रा, जिन्हें आज संथाल परगना में झामुमो का चाणक्य कहा जा रहा है।
साहिबगंज लोकसभा सीट पर झामुमो का दबदबा पिछले तीन चुनावों से लगातार कायम है और यह सीट अब पार्टी का अभेद्य किला मानी जाती है। लेकिन असली सियासी उलटफेर की कहानी राजमहल विधानसभा सीट से शुरू होती है, जहां 2009, 2014 और 2019 में लगातार भाजपा का कब्जा रहा। 2024 के विधानसभा चुनाव में पंकज मिश्रा की सधी हुई राजनीतिक रणनीति ने इस किले को भी ढहा दिया। भाजपा के दो बार के विधायक अनंत ओझा को झामुमो के मोहम्मद ताजुद्दीन उर्फ एमटी राजा ने 43,432 मतों के भारी अंतर से पराजित कर राजमहल को भाजपा मुक्त करा दिया।
इस जीत का असर सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं रहा। पूरे संथाल परगना में जरमुंडी को छोड़कर सभी सीटों पर महागठबंधन का कब्जा इसी रणनीतिक बढ़त का परिणाम माना गया। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में पंकज मिश्रा को संथाल परगना में झामुमो का चाणक्य कहा जाने लगा।
इस रणनीति की सबसे मजबूत झलक नगर निकाय चुनाव 2026 में देखने को मिली। साहिबगंज नगर परिषद में झामुमो समर्थित प्रत्याशी रामनाथ पासवान उर्फ छोटू पासवान ने अध्यक्ष पद पर 2,785 मतों से शानदार जीत दर्ज की। पिछले नगर निकाय चुनाव में जहां अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर भाजपा का कब्जा था, वहीं इस बार स्थिति पूरी तरह पलट गई। भाजपा समर्थित प्रत्याशी न सिर्फ पहले पायदान से फिसले, बल्कि सीधे तीसरे स्थान पर पहुंच गए और उन्हें महज 6,065 मत ही मिल सके। बिना किसी दलीय समर्थन के चुनाव लड़ रहे कपिल देव दास 8,865 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि भाजपा की हालत इतनी कमजोर हो चुकी है कि वह निर्दलीय प्रत्याशी से भी पीछे रह गई। यही हाल राजमहल नगर पंचायत का भी रहा।
तमाम दिग्गज नेताओं के मैदान में उतरने के बावजूद दोनों ही सीटों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी तीसरे स्थान पर सिमट गए। चुनाव प्रचार में भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री बजरंगी यादव, पूर्व विधायक अनंत ओझा, निवर्तमान नगर परिषद उपाध्यक्ष रामानंद साह सहित कई वरिष्ठ नेता सक्रिय रहे, लेकिन कमजोर नेतृत्व और बिखरी रणनीति के कारण उनकी मेहनत असर नहीं दिखा सकी।
स्थानीय बुद्धिजीवियों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि साहिबगंज के शहरी इलाकों में भाजपा का जनाधार लगातार खिसक रहा है। इसके उलट, झामुमो ने पंकज मिश्रा के नेतृत्व में शहरी वोटरों से विकास, स्थायित्व और भविष्य की राजनीति पर सीधा संवाद कायम किया। यही कारण है कि भाजपा की परंपरागत शहरी पकड़ भी अब ढीली पड़ती जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम पर झामुमो के केंद्रीय सचिव सह प्रवक्ता पंकज मिश्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “यह जीत किसी एक व्यक्ति या पार्टी की नहीं, बल्कि साहिबगंज और राजमहल की जनता के भरोसे की जीत है। हमने चुनाव को नकारात्मक राजनीति से हटाकर विकास, रोजगार और शहरी भविष्य के सवालों से जोड़ा। जनता ने उसी सोच पर मुहर लगाई। हमारा लक्ष्य सत्ता नहीं, बल्कि क्षेत्र का सर्वांगीण विकास है।”
कुल मिलाकर, साहिबगंज नगर परिषद और राजमहल नगर पंचायत में आए नतीजे इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि साहिबगंज की शहरी राजनीति में अब नया अध्याय शुरू हो चुका है। झामुमो के चाणक्य पंकज मिश्रा की रणनीति के सामने भाजपा का कमजोर नेतृत्व टिक नहीं सका, और साहिबगंज से भाजपा की राजनीतिक जमीन खिसककर लगभग समाप्ति की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।
(नोट: फोटो AI जनरेटेड है। रियल नहीं है।)
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