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दीवाली पर मोहब्बत का दिया जलाएं, छठ पर्व आस्था और समानता का प्रतीक
Dumka: झारखंड शिक्षित बेरोजगार युवा मंच के संस्थापक अध्यक्ष सह झारखंड पॉलिटेक्निक छात्र संघ के प्रदेश सचिव मोहम्मद शाह क़मर मुर्शाद ने राज्यवासियों से अपील की है कि दीवाली और छठ महापर्व को शांति, प्यार, भाईचारे और सद्भावना के साथ मनाएं। उन्होंने कहा कि इन त्योहारों की असली पहचान आपसी एकता और प्रेम है।
शाह क़मर ने कहा कि दीवाली के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अयोध्या लौटने पर असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक स्वरूप दीप प्रज्वलित किया गया था। “आज के समय में हमें भी नफ़रत, मतभेद, हिंसा और बुराई के अंधकार को मिटाकर सद्भावना और मोहब्बत का दीप जलाना चाहिए,” उन्होंने कहा। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि देश के वीर शहीदों के नाम पर भी एक दीपक जरूर जलाएं।

छठ पर्व आस्था, समानता और लोक परंपरा का प्रतीक
उन्होंने कहा कि छठ महापर्व झारखंड और बिहार की साझा सांस्कृतिक विरासत है, जिसे सभी धर्मों के लोग मिलजुलकर मनाते हैं। यह चार दिवसीय आस्था का पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। इस दौरान श्रद्धालु डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
छठ महापर्व की प्रमुख विशेषताएँ:
- सूर्य देव और छठी मैया की पूजा।
- डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पण।
- श्रद्धालुओं द्वारा 36 घंटे का निर्जला उपवास।
- चार दिवसीय अनुष्ठान- नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य।
- सात्विक भोजन और प्रसाद का भेदभावरहित वितरण।
- पारंपरिक लोकगीतों और भक्ति गीतों से भरा आस्था का माहौल।
शाह क़मर ने कहा कि छठ पर्व समानता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है, जिसमें प्रसाद वितरण में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि इन पर्वों को पारंपरिक मर्यादा और आपसी प्रेम के साथ मनाएं ताकि झारखंड में भाईचारे और एकता का संदेश दूर-दूर तक जाए।
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