Sahibganj: कर्तव्यहीनता को लेकर विधायक प्रतिनिधि पद से हटाया! निष्काषित होने से डर से दिया शाहजहां ने इस्तीफा?

Sahibganj: Removed from the post of MLA representative for dereliction of duty! Shah Jahan resigned out of fear of being expelled?

Sahibganj, 17 अगस्त: झामुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष और बोरियो विधायक प्रतिनिधि रहे शाहजहां अंसारी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पहले तो संगठन ने उन्हें जिला अध्यक्ष पद से हटाकर नया चेहरा सामने किया। इसके बाद बगावती तेवर अपनाने और पार्टी लाइन से इतर बयानबाजी करने के कारण उनकी राह और कठिन हो गई। इस बीच अवैध खनन मामले में तालझारी थाना में उन पर प्राथमिकी दर्ज होना उनकी छवि पर बड़ा धब्बा साबित हुआ।

इसी क्रम में आज बोरियो विधायक धनंजय सोरेन ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर शाहजहां अंसारी को कर्तव्यहीनता का परिचय देने के कारण विधायक प्रतिनिधि पद से हटा दिया। विधायक ने पत्र में स्पष्ट लिखा कि शाहजहां अंसारी अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रहे थे, इसलिए उन्हें इस पद से मुक्त किया जाता है। साथ ही विधायक ने यह भी कहा कि अभी फिलहाल किसी नए व्यक्ति को इस पद पर मनोनीत नहीं किया जाएगा और वे स्वयं जिला स्तरीय बैठकों में भाग लेंगे।

वहीं दूसरी ओर, राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि शाहजहां अंसारी को पार्टी जल्द ही अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित करने वाली थी। इसी आशंका से बचने और अपनी राजनीतिक साख बनाए रखने के लिए शाहजहां ने स्वयं ही झामुमो से इस्तीफा दे दिया। रविवार को उन्होंने केंद्रीय अध्यक्ष के नाम पत्र लिखकर केंद्रीय समिति सदस्य पद, साधारण सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया।

शाहजहां ने पत्र में लिखा कि, “वे 1990 से झामुमो से जुड़े थे और लंबे समय तक पार्टी की सेवा की। लेकिन अब व्यक्तिगत कारणों से वे पार्टी और उसके सभी पदों से इस्तीफा दे रहे हैं।”

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम साफ तौर पर बताता है कि झामुमो पार्टी अनुशासनहीनता और अवैध गतिविधियों में शामिल किसी भी नेता या कार्यकर्ता को बख्शने के मूड में नहीं है। राज्य में झामुमो की सरकार है और उसी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष और विधायक प्रतिनिधि पर जब अवैध खनन का केस दर्ज हुआ, तब भी संगठन ने कोई नरमी नहीं दिखाई।

पार्टी सूत्र बताते हैं कि शाहजहां अंसारी की लगातार बगावती चाल और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी ने नेतृत्व का भरोसा तोड़ दिया था। यदि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया होता, तो पार्टी उन्हें निष्कासित करने की तैयारी कर चुकी थी।

शाहजहां अंसारी के इस्तीफे से यह संदेश साफ है कि झामुमो संगठनात्मक अनुशासन को सर्वोपरि मानता है। पार्टी अपने किसी भी नेता को कानून और नियमों से ऊपर नहीं मानती। कर्तव्यहीनता और अवैध खनन प्रकरण ने शाहजहां अंसारी के राजनीतिक भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं झामुमो ने यह दिखा दिया है कि वह किसी भी हालत में अपनी छवि और अनुशासन से समझौता नहीं करेगा।

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Author: WASIM AKRAM

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