Barharwa (Sahibganj), 18 जुलाई: गुमानी नदी में आई भीषण बाढ़ ने बरहरवा और आसपास के गाँवों में किसानों की ज़िंदगी में त्रासदी ला दी है। खेतों में खड़ी धान, मक्का, सब्ज़ियाँ और अन्य फसलें या तो बह गई हैं या बाढ़ के पानी में सड़ने लगी हैं। बाढ़ ने न केवल फसलें तबाह कीं, बल्कि किसानों की महीनों की मेहनत और उम्मीदें भी बहा ले गई। बाढ़ का पानी इतनी तेज़ी से खेतों में फैला कि किसान कुछ भी बचा नहीं सके। कई खेतों में पानी अब भी जमा है, जिससे स्थिति और भी भयावह हो गई है। खेत वीरान पड़े हैं और किसानों के चेहरों पर मायूसी और तनाव साफ झलक रहा है।
कई किसान कर्ज लेकर खेती कर रहे थे, उन्हें अब सबसे ज्यादा चिंता कर्ज चुकाने की सता रही है। एक किसान ने कहा,
“हमने उम्मीद की थी कि इस बार फसल अच्छी होगी, लेकिन सारी मेहनत पानी में चली गई। अब न बीज बचा, न खाद और न ही कोई सहारा।”
एक अन्य बुजुर्ग किसान ने बेबसी जताते हुए कहा,
“जो कुछ था, सब बह गया। अब तो घर चलाना भी मुश्किल हो गया है। खेत बर्बाद हो गए हैं और चूल्हा बुझ गया है।”
प्रभावित किसानों और ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत एवं मुआवज़े की माँग की है। उनका कहना है कि बाढ़ से हुए नुकसान का सही सर्वेक्षण कर किसानों को आर्थिक सहायता, बीज और खाद मुहैया कराई जाए, ताकि वे दोबारा खेती की शुरुआत कर सकें।
गुमानी नदी के किनारे बसे कई गाँवों की सड़कों पर पानी भर गया है, और कई जगहों पर घरों में भी पानी घुसने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। यह संकट छोटे किसानों के लिए दोहरी मार बनकर आया है, एक तरफ फसलें गईं, दूसरी ओर रहने-खाने की समस्या खड़ी हो गई।
ये भी पढ़ें: Sahibganj: संगठन सृजन 2025 – कांग्रेस की मासिक बैठक में ग्राम पंचायत स्तर पर संगठन को सशक्त करने पर जोर









