Sahibganj: पूर्वी प्राणपुर में बाढ़ जैसे हालात, ग्रामीणों ने सरकारी मदद नहीं मिलने का लगाया आरोप, स्वास्थ्य उपकेंद्र भी पानी में डूबा

Sahibganj: Flood wreaks havoc in East Pranpur, villagers allege lack of government help, health center also submerged in water
  • गंगा के उफान से गांव जलमग्न, लोग केले के तनों से बनी नावों पर जान जोखिम में डालकर कर रहे आवाजाही

Udhwa (Sahibganj), 10 अगस्त: गंगा नदी के उफान ने उधवा प्रखंड के पूर्वी प्राणपुर पंचायत के मुर्तुज टोला, हाफू टोला, 10 नंबर नास और श्रीघर साहेब टोला सहित कई गांवों को जलमग्न कर दिया है। गांव के घर, खेत और रास्ते पानी में डूब चुके हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि हालात इतने गंभीर हैं कि लोग अपने घरों के अंदर मचान बनाकर, छतों में या ऊंची जगहों पर शरण लेकर किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं, जबकि कई खटिया के नीचे ईंटें लगाकर दिन गुजारने को विवश हैं। बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है, जिससे गरीब तबके के लोगों की मुश्किलें चरम पर हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि घर में रखा गेहूं, चावल और अन्य राशन पानी में बह या सड़ गया है। एक सप्ताह से ऊंची जगह पर शरण लिए बैठे हैं, लेकिन सरकारी मदद का कोई नामोनिशान नहीं।

तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि पूर्वी प्राणपुर स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र पूरी तरह से पानी में डूबा हुआ है। बाढ़ जैसी स्थिति में जहां संक्रामक बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है, वहीं यह स्वास्थ्य केंद्र खुद मदद के बजाय लाचार स्थिति में है। इससे ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं मिलना लगभग असंभव हो गया है।

Sahibganj: Flood wreaks havoc in East Pranpur, villagers allege lack of government help, health center also submerged in water

कई परिवार, खासकर गरीब तबके के लोग, अपने बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। तस्वीरों में महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे पानी में खड़े दिखाई दे रहे हैं। इनके घरों के अंदर रखा अनाज, कपड़े और जरूरत का सामान पानी में डूबकर नष्ट हो चुका है। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ से 20 एकड़ से ज्यादा में खड़ी मकई की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। इससे पहले से आर्थिक संकट झेल रहे किसान अब पूरी तरह बेहाल हैं। गांव के सभी शौचालय और चापाकल बाढ़ में डूब गए हैं, जिससे पीने के पानी और स्वच्छता की भारी समस्या पैदा हो गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक किसी भी प्रकार का सरकारी राहत कार्य शुरू नहीं हुआ है। न तो खाद्यान्न मिला है, न ही स्वच्छ पानी की व्यवस्था हुई है। मजबूर होकर लोग केले के तनों और लकड़ियों को बांधकर अस्थायी नाव बना रहे हैं और उसी पर सवार होकर जान जोखिम में डालकर एक जगह से दूसरी जगह पहुंच रहे हैं। ग्रामीण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तुरंत राहत सामग्री, स्वच्छ पानी, नावों की पर्याप्त व्यवस्था और स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो बाढ़ के बाद महामारी फैलने का खतरा और बढ़ जाएगा। 

वहीं मामले को लेकर उधवा प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन खबर लिखे काने तक संपर्क नहीं हो पाया।

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Author: WM 24x7 News

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