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क्या फिर से हाजिकुल के झांसे में आये अधिकारी और शुरू हुई मैनेजमेंट पॉलिसी?
Barharwa (Sahibganj): बरहरवा अंचल अधिकारी (सीओ) अनोज कुमार गुरुवार को अंचल क्षेत्र के विभिन्न पत्थर खदानों और क्रेशरों का औचक निरीक्षण करने निकले। औचक निरीक्षण तो अपनी जगह ठीक है, लेकिन इस निरीक्षण की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सीओ साहब ने इस दौरे में अपने साथ बरहरवा अंचल के पूर्व गार्ड हाजिकुल शेख को शामिल किया।
बताया जा रहा है कि सीओ साहब ने पथरिया और मयूरकोला पंचायत के ढाटापाड़ा, पीपल जोड़ी समेत कई मौजा में चल रहे खनन व क्रेशरों का निरीक्षण कर पत्थर व्यवसायियों को दिशा-निर्देश दिए। सीओ का कहना है कि, “हाजिकुल शेख को केवल हेल्प के लिए साथ ले जाया गया।” लेकिन असली सवाल यह है कि हेल्प के नाम पर हाजिकुल ही क्यों?
कार्यालय में दर्जनों कर्मचारी, फिर हाजिकुल ही क्यों?
बरहरवा अंचल कार्यालय में दर्जनों कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में निरीक्षण के लिए किसी सरकारी कर्मचारी को न ले जाकर एक विवादास्पद छवि वाले पूर्व गार्ड को साथ ले जाना कहीं न कहीं प्रशासन की कार्यप्रणाली और इरादों पर सवाल खड़े करता है। क्या यह संयोग है या फिर उस पुराने नेटवर्क का इस्तेमाल, जिसके ज़रिए पत्थर कारोबार और चेकनाका पर वसूली चलती आई है?
खनन क्षेत्र और हाजिकुल, क्या है नया गठजोड़?
बरहरवा अंचल क्षेत्र, खासकर कोटालपोखर, लंबे समय से अवैध खनन और पत्थर परिवहन के लिए विवादों में रहा है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, सोशल मीडिया एवं राजनैतिक कार्यकर्ताओं द्वारा इस कारोबार से प्रशासन और बिचौलियों की मिलीभगत के आरोप लगातार लगते रहे हैं। आरोप यह भी है कि यहाँ एक बड़ा सुनियोजित और संगठित नेटवर्क कार्य करता है। अब सवाल उठ रहा है कि
- क्या हाजिकुल अब भी उसी नेटवर्क का हिस्सा है?
- क्या निरीक्षण के नाम पर उसे पत्थर कारोबारियों तक संकेत पहुंचाने के लिए साथ ले जाया गया?
- या फिर यह महज इत्तेफाक है कि सीओ साहब को मदद के लिए वही शख्स याद आया जो खुद विवादों में घिरा हुआ है?
विवादों से घिरा रहा है हाजिकुल
हाजिकुल शेख कोई साधारण नाम नहीं है। यह वही पूर्व अंचल गार्ड है जिसका नाम कोटालपोखर चेकनाका से अवैध वसूली और बंदरबांट में उछल चुका है। हाल ही में वायरल हुए एक ऑडियो में उसका नाम सीधे तौर पर जुड़ा था, जिसमें कथित रूप से रोज़ाना के मैनेजमेंट की बातें की गई थीं।
विडंबना यह है कि उस वायरल ऑडियो पर अब तक न तो कोई जांच बैठी और न ही कोई कार्रवाई हुई। और अब वही हाजिकुल सीओ साहब के साथ खनन क्षेत्र का निरीक्षण करता दिख गया। सूत्रों की माने तो हाजिकुल अधिकारीयों के साथ अपनी नजदीकियां दिखाकर उसका इस्तेमाल चेकनाका और खनन क्षेत्रों से अवैध वसूली और उसके बंदरबांट के लिए किया करता है।
पारदर्शिता पर गहरे सवाल
सीओ अनोज कुमार का यह कहना कि हाजिकुल को केवल मदद के लिए साथ ले जाया गया, उतना ही मासूम लगता है जितना अवैध खनन में पारदर्शिता की बातें। प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि पहले से विवादित नाम वाले व्यक्ति को लेकर निरीक्षण करना कहीं न कहीं गंभीर संदेह पैदा करता है। बरहरवा अंचल अधिकारी का यह निरीक्षण अब चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर जिले में अवैध खनन और परिवहन पर कार्रवाई की बातें होती हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं विवादित चेहरों को प्रशासनिक दौरों में शामिल किया जाता है, जिन पर खुद भ्रष्टाचार और बंदरबांट के आरोप हैं।
क्या कहते है अंचलाधिकारी?
अंचलाधिकारी, बरहरवा अनोज कुमार ने कहा कि,
“मैं खनन क्षेत्र व रास्तों से वाकिफ नहीं था, इसी कारण हाजिकुल शेख को केवल हेल्प के लिए साथ ले जाया गया।मुझे पूर्व से यह भी ज्ञात नहीं था कि हाजिकुल का नाम खनन और चेकनाका को लेकर विवादों से जुड़ा हुआ है।”









